ऊर्जा क्षेत्र के 11 सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसयू) का घाटा 1,76,003.33 करोड़ रुपये पहुंच गया है। इसका खुलासा विधानमंडल के दोनों सदनों में पेश भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में हुआ है। इसके अनुसार 31 मार्च, 2021 को ऊर्जा क्षेत्र के 11 पीएसयू की कुल संचित हानि 176003.33 करोड़ थी।
सीएजी ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के वित्तीय कार्यकलापों का अध्ययन करने के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार की है। इसके मुताबिक 31 मार्च, 2021 को सीएजी के लेखा परीक्षा के क्षेत्राधिकार में 115 पीएसयू (94 सरकारी, 15 सरकार नियंत्रित अन्य कंपनियां व छह सांविधिक निगम) और 44 अकार्यरत पीएसयू शामिल थे। 11 पीएसयू के अध्ययन में सामने आया कि इनकी संचित हानि 1,76,003.33 करोड़ पहुंच गई। इसमें सबसे ज्यादा 90,914.37 करोड़ का घाटा पावर कॉर्पोरेशन का था।
इसके अलावा जल विद्युत निगम, पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन, पूर्वांचल, पश्चिमांचल, मध्यांचल व दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम, केस्को व यूसीएम कोल कंपनी का घाटा भी बढ़ा है। रिपोर्ट के अनुसार भारी संचित हानि से छह पीएसयू की वित्तीय स्थिति पूरी तरह से चरमरा गई है।
अन्य उपक्रम भी घाटे में
रिपोर्ट में यूपी मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन, नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन, पिकप, अपट्रान पॉवरट्रॉनिक्स लि., यूपी स्टेट स्पिनिंग कंपनी लि., लखनऊ स्मार्ट सिटी लि., अलीगढ़ स्मार्ट सिटी लि., नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लि., उप्र राज्य सड़क परिवहन निगम के भी घाटे का खुलासा हुआ है। 13 अन्य पीएसयू का कुल घाटा 1,022.35 करोड़ रुपये है।
केवल चार पीएसयू ने प्रस्तुत किए वार्षिक लेखे
रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रदेश में 71 कार्यरत पीएसयू में से केवल चार ने 2020-21 के लिए अपने वार्षिक लेखे प्रस्तुत किए थे। शेष 67 के 274 लेखे बकाया थे। 44 अकार्यरत पीएसयू में से 40 के 699 लेखे बकाया थे। राज्य सरकार ने ऐसे 46 पीएसयू को 27,359.34 करोड़ रुपये दिए थे। इसमें 10,859.11 करोड़ पूंजी, 2476.54 करोड़ ऋण, 4,086.35 करोड़ अनुदान व 9,937.34 करोड़ रुपये सब्सिडी थी। रिपोर्ट में सिफारिश की है कि प्रशासनिक विभागों को पीएसयू के लेखाओं के बकाया को समाप्त करने के लिए सख्ती से अनुश्रवण करना चाहिए। सरकार पीएसयू के लेखे तैयार करने में आने वाली बाधाओं को भी देख सकती है और बकाया को समाप्त करने के लिए आवश्यक कदम उठा सकती है।