ऐसे संकेत हैं कि विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा असंतुष्ट विधायकों को समायोजन का तोहफा दे सकती है। कुछ को आयोग, बोर्ड व निगम में पद देकर उनकी नाराजगी दूर की जाएगी तो कुछ को भविष्य में मंत्रिपरिषद में मौका मिल सकता है। इसी के साथ मौजूदा पार्टी पदाधिकारियों में कुछ के पर कतरे जा सकते हैं क्योंकि ये संगठन की अपेक्षा पर खरे नहीं उतर पाए हैं। इनकी जगह नए लोगों को मौका दिया जा सकता है।
दरअसल, पुलिस व प्रशासन के रवैये से बीते तीन-चार महीनों में विधायकों की नाराजगी जिस तरह सार्वजनिक हुई है, उसने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। नेतृत्व को इस बात का अहसास है कि विधायकों की नाराजगी अकारण नहीं है। कुछ जगहों पर अधिकारियों ने जान-बूझकर जनप्रतिनिधियों को अपमानित करने वाले काम किए।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि चिंता का प्रमुख कारण इन घटनाओं से पार्टी की अनुशासनात्मक छवि का दरकना है। ऐसे में विधायकों के सम्मान व महत्व का संदेश देना जरूरी हो गया है।
प्रदेश में पिछड़ा वर्ग आयोग, अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक आयोग सहित अन्य कुछ संस्थाओं के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व सदस्यों के पद रिक्त हैं। बीज विकास निगम सहित कुछ निगमों व बोर्डों में भी पद खाली हैं। पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष फागू चौहान बिहार के राज्यपाल बनाए जा चुके हैं। उनके राज्यपाल बनने के बाद से पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष का पद रिक्त है।
अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति आयोग सहित कुछ अन्य संस्थाओं में उपाध्यक्षों व सदस्यों का कार्यकाल भी पूरा होने वाला है। इन पर भाजपा के लोगों को समायोजित किया जा सकता है।