सरकार ने 15 जिलों में जमीन चिह्नित कर वेयरहाउस जोन डवलप करने की योजना बनाई है। इसके अलावा इनलैंड कंटेनर डिपो भी डवलप कराए जाएंगे। सरकार ने दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, नेशनल हाईवे-1 (इलाहाबाद-हल्दिया), बुंदेलखंड में एनएच-44 पर लॉजिस्टिक हब डवलप कराने के लिए जगह चिह्नित की है। भाऊपुर इंडस्ट्रियल एरिया के पास तथा मुगलसराय-वाराणसी-मिर्जापुर इन्वेस्टमेंट जोन के नजदीक पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के आसपास के क्षेत्र में आजमगढ़ में 3000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में लॉजिस्टिक हब बन सकता है। राष्ट्रीय राजमार्ग 44 से सटे 5567 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित झांसी राष्ट्रीय निवेश क्षेत्र में भी इस हब की संभावनाएं है। यूपी में इस समय 71.84 लाख मीट्रिक टन क्षमता वाले करीब 174 वेयरहाउस हैं। लॉजिस्टिक सेक्टर के निवेशक वेयर हाउसिंग, ई-कॉमर्स हब, रियल टाइम लॉजिस्टिक व डिजिटलीकरण, रोबोटिक्स आदि क्षेत्र में निवेश कर सकते हैं। सरकार 1000 एकड़ से अधिक जमीन पर विकसित होने वाले लॉजिस्टिक पार्कों को नई औद्योगिक निवेश व रोजगार प्रोत्साहन नीति के तहत सुविधाएं देंगी। इन्हें ब्याज प्रतिपूर्ति, इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी से छूट, ईपीएफ प्रतिपूर्ति की सुविधा, परिवहन वाहनों की खरीद पर प्रोत्साहन मिलेगा।
पश्चिमांचल में निवेश पर मध्यांचल की तरह सुविधाएं
नई औद्योगिक नीति में पश्चिमांचल में इंडस्ट्रियल पार्क आदि विकसित करने पर किसी छूट की व्यवस्था नहीं थी। सूत्रों के अनुसार कैबिनेट ने पश्चिमांचल क्षेत्र में इंडस्ट्रियल पार्क की स्थापना पर मध्यांचल की तरह छूट देने का फैसला किया है। पूर्वांचल व बुंदेलखंड को पहले से ही एक समान सहूलियतें मिलने की व्यवस्था है।