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लघु व मझोले उद्यमियों के लिए सरकार ने खोला पिटारा, ब्याज में मिलेगी 5 प्रतिशत की छूट

Wed, 13 Dec 2017 11:54 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
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योगी सरकार ने छोटे-मझोले उद्यमियों के लिए भी प्रोत्साहन का पिटारा खोल दिया है। निजी क्षेत्र में 20 एकड़ से अधिक का औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने पर बैंक लोन के 5 फीसदी ब्याज का भुगतान सरकार करेगी। इतना ही नहीं, औद्योगिक क्षेत्र के बीच में आ रही ग्राम समाज की जमीन सर्किल रेट पर मुहैया कराई जाएगी। इसके लिए कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम प्रोत्साहन नीति-2017 पर मुहर लगा दी।
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नीति के तहत उद्योग लगाने वाले उद्यमियों की क्रेडिट गारंटी का भुगतान राज्य सरकार करेगी। पांच साल तक नियोक्ता के ईपीएफ शेयर का भार भी सरकार वहन करेगी। भूमि की उपलब्धता बढ़ाने का भी लगातार प्रयास किया जाएगा। फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) संबंधी नियमों में बदलाव का फैसला भी किया गया है।

निजी क्षेत्र में 20 एकड़ से अधिक के इंडस्ट्रियल एरिया विकसित करने के लिए जो भी बैंक लोन लिया जाएगा, उसके ब्याज में पांच साल तक पांच प्रतिशत की छूट विकासकर्ता को मिलेगी। इंडस्ट्रियल एरिया के बीच में आने वाली ग्राम समाज की जमीन का दाम सर्किल रेट से चार गुना नहीं लिया जाएगा। चूंकि यह राशि सरकारी खजाने में ही जाती है, इसलिए सर्किल रेट पर ही जमीन विकासकर्ता को दी जाएगी। इस क्षेत्र में प्रथम खरीदार को स्टांप शुल्क में 100 प्रतिशत की छूट दी जाएगी, बशर्ते उसका उद्योग प्रतिबंधित क्षेत्र में न हो। अगर ग्राम समाज की जमीन एक जगह पर 10 एकड़ से ज्यादा है तो उद्योग विभाग के माध्यम से उस जमीन का विकास करवाया जाएगा।
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पांच एकड़ जमीन का विकास कराएगा उद्योग विभाग

- फोटो : amar ujala
एक्सप्रेस-वे के किनारे 5 एकड़ या उससे अधिक जमीन का विकास भी उद्योग विभाग से करवाया जाएगा। कारोबारी सुगमता को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक अनापत्ति प्रमाण पत्र ऑनलाइन ही जारी करने की व्यवस्था की जाएगी। हर जिले में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम इकाइयों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘एक जनपद-एक उत्पाद’ की अवधारणा विकसित की जाएगी। इन उत्पादों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई जाएगी।

उद्यमियों को विशेषज्ञों की सहायता निशुल्क मिलेगी
जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्रों में सूक्ष्म एवं लघु उद्यमियों और स्वरोजगार के इच्छुक युवाओं को निशुल्क विशेषज्ञ सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके लिए प्रत्येक जिले में सीए का एक पैनल बनाया जाएगा, जो बैंकों से लोन के लिए प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करेंगे। प्रोजेक्ट रिपोर्ट पर बैंक से लोन मिलने पर स्वीकृत लोन की दो प्रतिशत या वास्तविक खर्च की राशि का भुगतान सरकार की ओर से विशेषज्ञों को किया जाएगा। सामान्य वर्ग के केस में यह राशि अधिकतम 1 लाख रुपये और महिला व एससी-एसटी के केस में 1.5 लाख रुपये तक रहेगी।

विश्वकर्मा श्रम सम्मान व मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना होगी शुरू
भाजपा के संकल्प पत्र की घोषणा के अनुसार, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना लागू करने की बात भी नई नीति में कही गई है। इसके तहत मार्जिन मनी अनुदान एवं ब्याज अनुदान की सुविधा दी जाएगी। यह सुविधा बैंक से ऋण लेने पर उपलब्ध होगी। शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना शुरू की जाएगी। इसमें लाभार्थियों को उद्योग और सेवा क्षेत्र में उद्यम स्थापित करने के लिए मार्जिन मनी अनुदान और ब्याज अनुदान दिया जाएगा। इन परियोजनाओं को प्रधानमंत्री मुद्रा योजना और स्टैंड अप इंडिया योजना के साथ समन्वित किया जाएगा।

यूपी में आसानी से लग सकेंगी आईटी इकाइयां

प्रदेश में अब सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) इकाइयां लगाना काफी आसान हो जाएगा। राज्य सरकार तमाम सुुविधाओं के साथ आर्थिक मदद भी देगी। इसके लिए बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में उप्र सूचना प्रौद्योगिकी एवं स्टार्ट अप नीति-2017 को मंजूरी दे दी गई। योगी सरकार ने अपने गठन के कुछ समय बाद प्रदेश की औद्योगिक निवेश तथा रोजगार प्रोत्साहन नीति-2017 घोषित की थी। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण उद्योग तथा आईटी, स्टार्ट अप्स केलिए नई इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण नीति और उप्र सूचना प्रौद्योगिकी एवं स्टार्ट अप नीति को रोजगारपरक बनाने की जरूरत भी महसूस की जा रही थी। इससे प्रदेश के अधिकाधिक शिक्षित युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

सूचना प्रौद्योगिकी एवं स्टार्ट अप नीति-2017 केअंतर्गत पहले मौजूद प्रोत्साहन जैसे ब्याज उपादान, स्टांप ड्यूटी व इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी से छूट, भविष्य निधि की शत-प्रतिशत प्रतिपूर्ति और स्व प्रमाणन योजनाओं का लाभ मिलता रहेगा। इसके साथ ही टियर-2 और टियर-3 के शहरों में आईटी क्षेत्र की इकाइयों को उप्र स्थित महाविद्यालयों से न्यूनतम 50 नए सूचना प्रौद्योगिकी-बीपीएम पेशेवरों की सालाना भर्ती के लिए 20 हजार रुपये प्रति कर्मी की दर से रिक्रूटमेंट सहायता दी जाएगी।

शोध एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए घरेलू व अंतरराष्ट्रीय पेटेंट स्वीकृत होने पर वास्तविक फाइलिंग लागत की शत-प्रतिशत आपूर्ति की जाएगी। घरेलू पेटेंट्स के लिए यह सीमा 5 लाख रुपये तथा अंतरराष्ट्रीय पेटेंट्स के लिए 10 लाख तक रखी गई है।

न्यूनतम 200 कर्मियों को रोजगार देने वाली सूचना प्रौद्योगिकी इकाई को प्रति कर्मी 1500 रुपये की दर से भूमि के लागत की 25 प्रतिशत की आपूर्ति की जाएगी। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र या सूचना प्रौद्योगिकी जनित सेवा क्षेत्र की एमएसएमई इकाइयों को लीज या रेंटल चार्ज के 25 प्रतिशत राशि की भरपाई की जाएगी। यह मदद तीन साल के लिए होगी और अधिकतम राशि 10 लाख रुपये प्रतिवर्ष तक हो सकती है। इसी तरह बिजली बिलों में 25 प्रतिशत की छूट मिलेगी, जिसकी अधिकतम सीमा 30 लाख निर्धारित की गई है।

नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे प्राधिकरण क्षेत्र ईएमजेड घोषित

कैबिनेट ने देश-विदेश की प्रतिष्ठित इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की इकाइयों की स्थापना के लिए नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग जोन (ईएमजेड) घोषित करने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है। इसके लिए उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण नीति-2017 का अनुमोदन कर दिया गया है।

यहां बता दें कि पहले से लागू ‘उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण नीति’ के तहत प्रोत्साहन उन्हीं इकाइयों को मिलता था, जो इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर में होती थीं। इसके चलते पर्याप्त निवेश नहीं हो पा रहा था। उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण नीति-2017 के तहत स्थापित होने वाली इकाइयों को पूंजी व ब्याज में छूट, कर प्रतिपूर्ति, स्टांप शुल्क और भूमि मूल्य में छूट मिलेगी।

उन्हें क्रय योग्य फ्लोर एरिया रेश्यो (एफएआर) और वर्कर्स के लिए डॉरमेट्री, कैंटीन व डिस्पेंसरी के निर्माण की अनुमति भी होगी। इन इकाइयों में यूपी के मूल निवासी कार्मिकों को देश-विदेश में उच्च कौशल प्रौद्योगिकी प्रशिक्षण जैसे एम्बेडेड सिस्टम डिजाइन, वीएलएसआई डिजाइन, पीसीबी डिजाइन व मैन्युफैक्चरिंग, चिप मैन्युफैक्चरिंग और टीएफटी मैन्युफैक्चरिंग के लिए प्रशिक्षण शुल्क की भरपाई का प्रावधान भी है।

इस नीति का उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग स्किल डेवलेपमेंट (ईएसडीएम) के क्षेत्र में 20 हजार करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करना और वर्ष 2022 तक तीन लाख व्यक्तियों को रोजगार देना है।

सचिवालय के अफसरों को भी लगानी होगी बायोमीट्रिक हाजिरी

सचिवालय में कार्यरत सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को भी बायोमीट्रिक हाजिरी लगानी होगी। बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में इससे संबंधित प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई। इसके तहत उत्तर प्रदेश सचिवालय में बायोमीट्रिक एवं आधार लिंक्ड उपस्थिति प्रणाली को लागू करने का फैसला किया गया है।

प्रदेश सरकार ने शासन एवं प्रशासन को अधिक जवाबदेह बनाने के लिए अनेक कदम उठाए हैं। इसके तहत सचिवालय से लेकर फील्ड स्तर के कार्यालयों में अधिकारियों व कर्मचारियों को समय से उपस्थित होना होगा। सचिवालय में बायोमीट्रिक हाजिरी लगाने की व्यवस्था होने पर आवाजाही में मनमानी खत्म हो जाएगी। राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि जल्द ही हाजिरी लगाने की नई व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।
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अधिनियम में स्पष्ट रूप से परिभाषित होगा जूनियर बेसिक और जूनियर हाईस्कूल

- फोटो : demo pic
उत्तर प्रदेश जूनियर हाईस्कूल (अध्यापकों एवं अन्य कर्मचारियों के वेतन का भुगतान)(संशोधन) अध्यादेश, 2017  और उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा (संशोधन) अध्यादेश, 2017 के प्रतिस्थानी विधेयक को विधानमंडल सत्र में लाने के प्रस्ताव को कैबिनेट ने हरी झंडी दे दी है।

प्रदेश में प्रबंध तंत्र द्वारा संचालित मान्यता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में अध्यापकों और कर्मचारियों को वेतन भुगतान के लिए उप्र जूनियर हाईस्कूल (अध्यापकों एवं अन्य कर्मचारियों के वेतन का भुगतान) अधिनियम, 1978 के प्रावधान लागू हैं। इस अधिनियम की धारा-2 में ‘संस्था’ पद परिभाषित है, पर ‘जूनियर हाईस्कूल’ पद परिभाषित नहीं है।

इसके चलते न्यायालय में विभाग का पक्ष कमजोर हो जाता है। ऐसी स्थिति में जूनियर हाईस्कूल पद को परिभाषित करने के लिए उप्र जूनियर हाईस्कूल (अध्यापकों एवं अन्य कर्मचारियों के वेतन का भुगतान)(संशोधन) अध्यादेश, 2017 जारी किया गया। इस अध्यादेश के प्रतिस्थानी विधेयक को विधानमंडल के शीत सत्र में लाने के निर्णय पर कैबिनेट ने मुहर लगा दी।

इसी तरह उप्र बेसिक शिक्षा (संशोधन) अध्यादेश, 2017 के प्रतिस्थानी विधेयक को विधानमंडल सत्र में लाया जाएगा। इसमें जूनियर बेसिक स्कूल और जूनियर हाईस्कूल को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।
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