प्रदेश सरकार ने सूबे के तीन स्पोर्ट्स कॉलेजों में अस्थायी तौर पर कार्यरत अध्यापकों व सहायक अध्यापकों को विनियमित करने का फैसला किया है।
इनमें उप्र स्पोर्ट्स कॉलेज सोसाइटी के तहत संचालित गुरु गोविंद सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज लखनऊ, वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज गोरखपुर और सैफई स्पोर्ट्स कॉलेज शामिल हैं। इस संबंध में खेल विभाग की ओर से तैयार की गई पॉलिसी को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। इसके मुताबिक उन्हीं शिक्षकों को नियमित किया जाएगा, जो इस पद के लिए तय 40 वर्ष की आयु सीमा पार कर चुके होंगे।
दरअसल इन तीनों कॉलेजों में मानदेय के आधार पर अध्यापक व सहायक खेल अध्यापकों की तैनाती की गई है जो काफी दिनों से कार्यरत हैं। इनसे प्रशिक्षण पाए खिलाड़ी कई अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं।
इससे पहले वित्त विभाग द्वारा जारी विनियमितीकरण से संबंधित शासनादेशों में इन खेल अध्यापकों एवं सहायक खेल अध्यापकों को विनियमित करने की कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। इसके बावजूद विनियमितीकरण की उम्मीद में ये काम करते रहे और इनकी आयु 40 वर्ष से अधिक हो गई। इसे देखते हुए सरकार ने इन्हें विनियमित करने का फैसला किया है।
केवल इन्हीं शिक्षकों को मिलेगा लाभ
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पॉलिसी के मुताबिक उन शिक्षकों को ही विनियमित का लाभ मिलेगा, जिन्होंने एनआईएस डिप्लोमाधारी होने के साथ-साथ कम से कम 6 वर्ष तक प्रशिक्षण देने का कार्य किया हो और उनके द्वारा प्रशिक्षित खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धियां हासिल की हों।
इन अध्यापकों का विनियमितीकरण सृजित पद उपलब्ध होने की स्थिति में ही जाएगा। विनियमितीकरण के लिए विशेष सचिव खेल की अध्यक्षता में एक समिति गठित की जाएगी। अध्यापकों के विनियमितीकरण पर खर्च होने वाली राशि अनुदान के रूप में राज्य सरकार वहन करेगी।
डायल-100 में तैनात पुलिस कर्मियों को मिलेगा प्रोत्साहन मानदेय
प्रदेश सरकार पुलिस की डायल-100 परियोजना में तैनात किए जाने वाले पुलिस कर्मियों को प्रोत्साहन मानदेय देने जा रही है। कांस्टेबल से लेकर हेड कांस्टेबल तक 2000 रुपये प्रतिमाह अलग से मानदेय दिया जाएगा। सब इंस्पेक्टर व इंस्पेक्टरों को 2500 रुपये प्रतिमाह दिया जाएगा। कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई।
डायल-100 परियोजना में तैनाती के लिए पुलिस कर्मियों को प्रेरित करने के मकसद से सरकार ने प्रोत्साहन मानदेय देने का निर्णय किया है। वाहन चालक के रूप में तैनात किए जाने वाले होमगार्ड्स को ड्यूटी भत्ता व मानदेय के भुगतान संबंधी प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है। इस परियोजना में वाहन चालक के रूप में तैनात होने वाले होमगार्ड्स को परियोजना में उनकी नियोजन की अवधि तक के लिए गृह विभाग के विभागीय बजट से ड्यूटी भत्ते के रूप में 300 रुपये तथा दैनिक मानदेय के रूप में 150 रुपये देने का निर्णय किया गया है।
निजी सहभागिता से प्रदेश में स्थापित होगी खेल अकादमी
सरकार ने प्रदेश में विभिन्न खेलों के लिए अकादमी बनाने का निर्णय किया है। निजी सहयोग से स्थापित होने वाली इन अकादमियों के लिए सरकार ने नई पॉलिसी तैयार कराई है। इसे सोमवार को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी।
पॉलिसी के मुताबिक अकादमी में प्रदेश के 50 प्रतिशत खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देना अनिवार्य होगा। इंडोर खेलों के लिए 1 से 2 एकड़ और आउटडोर खेलों के लिए 3 से 5 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई जाएगी।
गौरतलब है, मुख्यमंत्री ने निजी सहभागिता से प्रदेश में खेल अकादमी की स्थापना की घोषणा की थी। इस बाबत नीति बनाने के लिए प्रमुख सचिव खेल डॉ. अनिता भटनागर जैन ने खेल संघों, अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनेक खिलाड़ियों व कोच के अलावा सानिया मिर्जा, पीटी ऊषा, गोपीचन्द, पादुकोण एकेडमी व लिएंडर पेस एकेडमी के संचालकों से चर्चा भी की थी। काफी विचार-विमर्श के बाद तैयार की गई नीति में कई विशेष बिंदुओं को शामिल किया गया है।
स्थानीय खिलाड़ियों के लिए आरक्षित होंगी 50 प्रतिशत सीटें
इसके मुताबिक प्रदेश में स्थापित होने वाली अकादमी में 50 प्रतिशत सीटें स्थानीय खिलाड़ियों के लिए आरक्षित रखनी होगी। इसमें से 15 प्रतिशत ऐसे खिलाड़ियों को प्रवेश देने का प्रावधान है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं।
निजी सहभागिता के आधार पर अकादमी खोलने के लिए उन्हीं मान्यता प्राप्त खेल संघों एवं अन्तरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को भूमि उपलब्ध कराई जाएगी जिन्होंने ओलंपिक, राष्ट्रमंडल खेल, एशियाई खेल, विश्व कप या विश्व चैम्पियनशिप में भागीदारी की हो।
नीति की खास बातें
-खेल अकादमी के लिए भूमि खेल विभाग उपलब्ध कराएगा।
-भारतीय ओलंपिक संघ द्वारा मान्यता प्राप्त खेलों के लिए ही एकेडमी स्थापित होगी।
-मान्यता प्राप्त खेलों के लिए एक अकादमी की ही स्थापना की जाएगी।
-अकादमी निर्माण की निगरानी के लिए प्रमुख सचिव खेल की अध्यक्षता में समिति गठित होगी।
आजम की नाराजगी के बाद जौहर विश्वविद्यालय को सौगात
अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री आजम खां की नाराजगी के बाद प्रदेश सरकार ने संस्कृति विभाग द्वारा बनवाया गया भव्य पंडाल मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय को दे दिया है। यह पंडाल 12.36 करोड़ की लागत से बना है। कैबिनेट ने सोमवार को संस्कृति विभाग के इस प्रस्ताव पर मुहर लगा दी।
दरअसल, आजम ने रामपुर स्थित अपने जौहर विश्वविद्यालय में संस्कृति विभाग से एक भव्य पंडाल बनवाया है। लेकिन संस्कृति विभाग ने 13 मई 2015 को एक शासनादेश जारी कर इस पंडाल के लिए जो शर्तें लगाई थीं उससे आजम संतुष्ट नहीं थे। इस पंडाल का स्वामित्व भी संस्कृति विभाग ने अपने पास रखा था।
विभाग की शर्त थी कि विश्वविद्यालय राज्य सरकार को शासकीय उपयोग के लिए यह पंडाल निशुल्क देगा। विश्वविद्यालय इसे न तो बेच सकता है और न ही किसी को हस्तांतरित कर सकता है। साथ ही उसने इन सारी शर्तों को लागू कराने के लिए डीएम को अधिकृत कर दिया था। यही बात आजम खां को हजम नहीं हो रही थी। उन्हें लगा कि जब सरकार बदलेगी तो यह पंडाल भी उनके हाथ से चला जाएगा।
नाराज आजम ने लिखवाई थी चिट्ठी
इसी से नाराज होकर आजम ने पिछले साल जून में संस्कृति विभाग के विशेष सचिव राम विशाल मिश्र को विश्वविद्यालय की ओर से एक कड़ी चिट्ठी लिखवाई थी। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार आरके कुरैशी ने यहां तक कहा था कि मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए सरकार ने जो 10 करोड़ रुपये की धनराशि अनुदान में दी है, उसे भी विश्वविद्यालय सरकारी कोष में जमा करवाने की अनुमति मांगता है। उन्होंने कहा, विश्वविद्यालय ऐसा कोई अनुदान स्वीकार नहीं करेगा जो विश्वविद्यालय का अस्तित्व खतरे में डाल दे।
इसके बाद संस्कृति विभाग सकते में आ गया। आजम की नाराजगी को देखते हुए विभाग ने इस शासनादेश की शर्तों को ही बदलने का प्रस्ताव बना दिया। नई शर्तों के तहत अब इस भव्य पंडाल पर विश्वविद्यालय का स्वामित्व होगा।
एक शर्त यह भी थी कि इस पंडाल पर स्थानीय निकाय, राज्य सरकार, केंद्र सरकार या फिर किसी अन्य प्राधिकारी द्वारा कोई कर या शुल्क लगाया जाएगा तो उसका भुगतान विश्वविद्यालय को देना होगा। इस शर्त को भी शिथिल कर दिया गया है। यानी इस पर लगने वाला कोई कर विश्वविद्यालय को नहीं देना होगा।
इस पंडाल पर आजम किसी भी कीमत पर जिला प्रशासन का हस्तक्षेप नहीं चाहते थे। उन्होंने कहा था कि इसमें राजनीतिक दलों की रैलियां, जिला प्रशासन की गोष्ठियां आदि नहीं करने दी जाएंगी। यह विश्वविद्यालय के भविष्य के लिए घातक होगा।
2790 सीजनल संग्रह अनुसेवकों की नौकरी होगी पक्की
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने नवनिर्मित सचिवालय ‘लोकभवन’ में पहला तोहफा सीजनल संग्रह अनुसेवकों को दिया। इस भवन में हुई पहली कैबिनेट बैठक में 2790 अनुसेवकों को नियमित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। ये 20-25 साल से सामयिक आधार पर काम कर रहे थे।
सूबे में राजस्व वसूली के लिए नियमित व सामयिक संग्रह अमीनों व अनुसेवकों की सेवा ली जाती है। सीजनल अमीनों के साथ सीजनल अनुसेवक रखे जाते हैं। संग्रह अनुसेवकों के लिए 50 प्रतिशत पद सीधी भर्ती के होते हैं। बाकी 50 फीसदी पद सामयिक संग्रह अनुसेवकों को नियमित करके भरा जाता है।
मगर, आठ सितंबर 2010 को वित्त व 15 मार्च 2012 को कार्मिक विभाग ने चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती पर रोक लगा दी थी। इससे सामयिक संग्रह अनुसेवकों को नियमित नहीं किया जा सका।
2010 में दिया गया था छूट का प्रस्ताव
राजस्व महकमे ने राजस्व संग्रह का काम विशिष्ट तरह का होने और आउटसोर्स के माध्यम से यह काम न कराने की स्थिति का हवाला देते हुए सामयिक संग्रह अनुसेवकों को 2010 के शासनादेश से छूट देने का प्रस्ताव किया था।
इसके अलावा सभी पात्र अनुसेवकों को नियमित करने के लिए इस पद पर नियमित करने का कोटा 50 प्रतिशत से बढ़ाकर एक बार के लिए 100 प्रतिशत करने का भी प्रस्ताव किया था।
कैबिनेट ने वित्त व कार्मिक महकमे के शासनादेश को इसके लिए शिथिल करने और सामयिक संग्रह अनुसेवकों के विनियमितीकरण के लिए नियमित नियुक्ति का कोटा एक बार के लिए 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।
इसके लिए उत्तर प्रदेश संग्रह अनुसेवक सेवा नियमावली- 2004 के नियम-5, 9, 18 व 21 में संशोधन की मंजूरी देते हुए नई संशोधन नियमावली- 2016 को भी मंजूरी दे दी।
हाईकोर्ट को मिलेगी निशुल्क जमीन
राज्य सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को निशुल्क भूमि उपलब्ध कराने का निर्णय किया है। इसके लिए तैयार प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। इसके मुताबिक हाइकोर्ट के निर्माणाधीन अस्थायी गेट के पास स्थित ऑफिस के निकट राजकीय मुद्रणालय की 3424 वर्गफुट जमीन हाईकोर्ट को हस्तांतरित कर दी जाएगी।
देवरिया केगौरी बाजार नगर पंचायत का होगा विस्तार
राज्य सरकार ने देवरिया जिले के नगर पंचायत गौरी बाजार के सीमा क्षेत्र का विस्तार करने का निर्णय किया है। इससे संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। प्रस्ताव के मुताबिक बाजार के आसपास के करीब डेढ़ दर्जन गांवों को नगर पंचायत की सीमा में शामिल किया जाएगा।
लघु उद्योग निगम के सेवा शुल्क में कटौती, पांच फीसदी लेगा
प्रदेश कैबिनेट ने लघु उद्योग निगम कानपुर को मैनपावर आउटसोर्सिंग एजेंसी के रूप में दिए जाने वाले सेवा शुल्क में कमी करने का फैसला किया है। निगम, कार्मिकों को दिए जाने वाले मासिक पारिश्रमिक का 5 प्रतिशत सेवा शुल्क के रूप में लेगा। अभी तक वह मासिक पारिश्रमिक का 10 प्रतिशत लेता था।
सरकार ने यह फैसला निगम की दरों को प्रतिस्पर्धात्मक बनाने और शासकीय विभागों में मितव्ययिता की दृष्टि से किया है। इसके लिए सेवा शुल्क संबंधी पूर्व में जारी शासनादेश में आंशिक संशोधन की मंजूरी दे दी गई है। बताते चलें, प्रदेश सरकार ने लघु उद्योग निगम को मैनपावर आउटसोर्सिंग एजेंसी नामित किया गया है। निगम विभिन्न विभागों, निगमों व उपक्रमों में मैनपावर की आपूर्ति करता है।
लघु उद्योग निगम के सेवा शुल्क में कटौती, पांच फीसदी लेगा
प्रदेश कैबिनेट ने लघु उद्योग निगम कानपुर को मैनपावर आउटसोर्सिंग एजेंसी के रूप में दिए जाने वाले सेवा शुल्क में कमी करने का फैसला किया है।
निगम, कार्मिकों को दिए जाने वाले मासिक पारिश्रमिक का 5 प्रतिशत सेवा शुल्क के रूप में लेगा। अभी तक वह मासिक पारिश्रमिक का 10 प्रतिशत लेता था।
सरकार ने यह फैसला निगम की दरों को प्रतिस्पर्धात्मक बनाने और शासकीय विभागों में मितव्ययिता की दृष्टि से किया है। इसके लिए सेवा शुल्क संबंधी पूर्व में जारी शासनादेश में आंशिक संशोधन की मंजूरी दे दी गई है।
बताते चलें, प्रदेश सरकार ने लघु उद्योग निगम को मैनपावर आउटसोर्सिंग एजेंसी नामित किया गया है। निगम विभिन्न विभागों, निगमों व उपक्रमों में मैनपावर की आपूर्ति करता है।
छोटे व मझोले उद्योगों के लिए अब कॉमन एप्लीकेशन फॉर्म
प्रदेश कैबिनेट ने छोटे व मझोले उद्योगों की स्थापना के लिए कॉमन एप्लीकेशन फॉर्म पर आधारित ऑनलाइन सिंगल विंडो (निवेश मित्र) की सुविधा उपलब्ध कराने का फैसला किया है। अब तक यह सुविधा बड़े उद्योगों तक सीमित थी।
लघु एवं मध्यम औद्योगिक इकाइयां वेबसाइट पर ऑनलाइन कॉमन एप्लीकेशन फ ॉर्म भरकर जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र को प्रिंट आउट की एक प्रति भेजेंगी। उपायुक्त जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र सभी विभागों से समन्वय बनाकर जिला उद्योग बंधु के माध्यम से आवश्यक स्वीकृतियां व अनापत्तियां दिलाएंगे।
इस नीति में लघु एवं मध्यम उद्योग (प्लांट व मशीनरी में पूंजी निवेश 25 लाख रुपये से 10 करोड़ रुपये तक करने वाली इकाइयां) भी इस सुविधा का लाभ कुछेक संशोधनों के साथ ले सकेंगे। कॉमन एप्लीकेशन फॉर्म के माध्यम से मिली स्वीकृतियों को प्राप्त करने के लिए संबंधित विभाग एक बार में ही सभी प्रकार की जानकारियां मांग सकेंगे। आबकारी विभाग को इस व्यवस्था से मुक्त रखा गया है।
इस व्यवस्था से लघु एवं मध्यम उद्योग आसानी से स्थापित किए जा सकेंगे। इससे कामकाज में पारदर्शिता आएगी और उद्यमियों का समय भी बचेगा। उन्हें विभागों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। विभाग भी समय से कार्य के लिए जवाबदेह होंगे। यह व्यवस्था पूरे प्रदेश में लागू होगी। इस व्यवस्था के प्रभावी संचालन तथा समस्याओं के समाधान के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्यस्तरीय समिति गठित होगी।
50 लाख मीट्रिक टन धान खरीदेंगी सरकारी एजेंसियां
कैबिनेट ने धान क्रय नीति को मंजूरी दे दी है। मूल्य समर्थन योजना के तहत खरीफ विपणन वर्ष 2016-17 में सामान्य (कॉमन) धान का समर्थन मूल्य 1470 रुपये और ग्रेड-ए धान का समर्थन मूल्य 1510 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। खरीद का लक्ष्य 50 लाख मीट्रिक टन रखा गया है।
इस नीति के तहत 1 अक्टूबर 2016 से 28 फरवरी 2017 तक राज्य और केंद्र सरकार की एजेंसियों के माध्यम से धान खरीदा जाएगा। 10 क्रय एजेंसियों के 2600 केंद्र खोले जाएंगे। खाद्य विभाग की विपणन शाखा के क्रय केंद्रों की संख्या 550 और लक्ष्य 12 लाख मीट्रिक टन होगा।
उप्र प्रदेश राज्य खाद्य एवं आवश्यक वस्तु निगम (एफएससी) के क्रय केंद्रों की संख्या 100 और लक्ष्य 3 लाख मीट्रिक टन होगा। उप्र कर्मचारी कल्याण निगम के क्रय केंद्रों की संख्या 150 और लक्ष्य 4 लाख मीट्रिक टन होगा।
पीसीएफ के क्रय केंद्रों की संख्या 1200 और लक्ष्य 10 लाख मीट्रिक टन निर्धारित किया गया है। उप्र कोऑपरेटिव यूनियन लिमिटेड के क्रय केंद्रों की संख्या 150 और लक्ष्य 3 लाख मीट्रिक टन होगा। यूपी एग्रो के क्रय केंद्रों की संख्या 150 और लक्ष्य 4 लाख मीट्रिक टन रखा गया है।
इन केंद्रों की होगी इतनी संख्या
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इसके अलावा भारतीय राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ (एनसीसीएफ ) के क्रय केंद्रों की संख्या 50 व लक्ष्य 1 लाख मीट्रिक टन, नैफेड के क्रय केंद्रों की संख्या 50 व लक्ष्य 1 लाख मीट्रिक टन, भारतीय खाद्य निगम के क्रय केंद्रों की संख्या 100 व लक्ष्य 2 लाख मीट्रिक टन, प्राइवेट प्लेयर्स (भारतीय खाद्य निगम) के क्रय केंद्रों की संख्या 100 व लक्ष्य 10 लाख मीट्रिक टन निर्धारित किया गया है।
लखनऊ सम्भाग के जिला लखीमपुर के अलावा बरेली, मुरादाबाद, मेरठ, सहारनपुर, आगरा, अलीगढ़, झांसी और चित्रकूट मंडलों में धान क्रय की अवधि 1 अक्टूबर, 2016 से 31 जनवरी 2017 तक निर्धारित की गई है।
लखनऊ सम्भाग के लखनऊ, रायबरेली, उन्नाव, सीतापुर व हरदोई, कानपुर, फैजाबाद, देवीपाटन, बस्ती, गोरखपुर, आजमगढ़, वाराणसी, मिर्जापुर और इलाहाबाद मंडलों में 1 नवंबर 2016 से 28 फरवरी 2017 तक खरीद होगी।
जिलों के अंदर एजेंसी वार क्रय केंद्रों का निर्धारण जिलाधिकारी करेंगे। क्रय केंद्र्र सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक खुलेंगे। हालांकि, जिलाधिकारी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार क्रय केंद्र के खुलने और बन्द होने के समय में बदलाव करने के लिए अधिकृत होंगे। क्रय केंद्र रविवार और राजपत्रित अवकाश में बंद रहेंगे।