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UP: 15 नवंबर तक दो-दो गांवों को गोद लेंगे अफसर

Fri, 07 Nov 2014 01:07 AM IST
शोभित श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
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सांसदों को गांव गोद दिये जाने की केंद्र सरकार की योजना की तर्ज पर अब प्रदेश सरकार भी अपने यहां गांवों को गोद देने जा रही है। हालांकि यह गांव जनप्रतिनिधियों के बजाय डीएम व सीडीओ को गोद दिये जाएंगे।
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सरकार ने यह योजना मां व बच्चों को कुपोषण से दूर करने के लिए शुरू की है। इसके तहत सरकार ने प्रत्येक डीएम व सीडीओ को अतिकुपोषित दो-दो ग्राम सभाओं को गोद लेने के निर्देश दिए हैं। 15 नवंबर तक यह कार्रवाई पूरी करनी होगी।

कुपोषण की रोकथाम व निवारण का एजेंडा डीएम की प्राथमिकता में होगा। प्रत्येक महीने डीएम व सीडीओ को गांवों में दौरा कर प्रगति की निगरानी भी करनी होगी।

मुख्य सचिव आलोक रंजन ने गुरुवार को प्रदेश के सभी डीएम व मुख्य विकास अधिकारियों को इसके निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पांच वर्ष से कम उम्र के आधे से अधिक बच्चों की मृत्यु का एक प्रमुख कारण कुपोषण है।
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अफसरों के तबादले पर भी नहीं बदलेगा गांव

मुख्य सचिव ने आदेश में लिखा है कि कुपोषण दूर करने के लिए समन्वित बाल विकास सेवाएं स्वास्थ्य एवं अन्य विभागों द्वारा कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इनमें समन्वय स्थापित करने में डीएम सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि गोद लेने में ध्यान रखा जाए कि जिले में जो सबसे अधिक कुपोषित ग्राम सभाएं हैं उन्हें पहले गोद लें।

एक बार ग्राम सभा गोद लिए जाने के बाद यदि अधिकारियों का तबादला होता है तब भी उनकी ग्राम सभाएं नहीं बदली जाएंगी। डीएम व सीडीओ को ग्राम सभाओं के गोद लेने की सूचना 20 नवंबर तक महानिदेशक राज्य पोषण मिशन को उपलब्ध करानी होगी।

ग्रामसभावार बनेगी कुपोषित बच्चों की सूची
प्रत्येक जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से ग्रामसभावार कुपोषित बच्चों की सूची बनेगी। इसमें एएनएमए आशाए आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री व मुख्य सेविकाएं काम करेंगी। पांच वर्ष तक के बच्चों का वजन लेकर अतिकुपोषित बच्चों को लाल श्रेणी में रखेंगे। सूची की एक प्रति खंड विकास अधिकारी व उपजिलाधिकारी के पास रहेगी। यह काम 30 नवंबर तक पूरा करना होगा।
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आंगनबाड़ी केंद्रों पर यह होंगे कार्यक्रम

-गर्भावस्था के दौरान महिला के वजन वृद्धि की निगरानीए टीकाकरणए आयरन की 100 गोलियां व अतिरिक्त आहार के संबंध में सलाह देना।

-छह माह तक के बच्चों का टीकाकरण व वजन करना। बच्चों को केवल मां के दूध की सलाह देना।
-छह महीने से दो वर्ष तक के बच्चों को ऊपरी आहार के संबंध में सलाह देना।

-उन घरों में जाकर भ्रमण करना जहां बच्चे हैं। यह देखना कि बच्चों की देखभाल कैसे हो रही है।
-दो वर्ष तक के बच्चों के खान-पान व स्वच्छता संबंधी व्यवहार पर ध्यान।

-कुपोषित बच्चों को पास के स्वास्थ्य केंद्र व पोषण पुनर्वास केंद्र पर रेफर करना।
-पांच वर्ष तक के बच्चों को विटामिन-ए की द्विवार्षिक खुराक व 100 दिन आयरन सीरप देन।
-सभी घरों में आयोडीन युक्त नमक के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करना।
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