प्रदेश के करीब एक लाख कर्मचारियों की दीपावली के पहले एक मन मांगी मुराद पूरी हो सकती है।
दरअसल, उत्तर प्रदेश शासन 14 वर्ष की सेवा पर पहली एसीपी (पदोन्नति वेतनमान) पाने वाले कर्मचारियों को दो साल बाद ही 16 वर्ष की सेवा पूरी होने पर दूसरी एसीपी देने पर सहमत हो गया है।
इस संबंध में जल्दी ही प्रस्ताव कैबिनेट के सामने ले जाने की तैयारी है। शासन में उच्च स्तर पर इस पर सहमति बन गई है।
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गौरतलब है कि पांचवें वेतन आयोग के फैसले के अनुसार कर्मचारियों को 14 वर्ष की सेवा पूरी करने पर पहली और 24 साल पर दूसरी एसीपी देने की व्यवस्था थी।
मगर, छठे वेतन आयोग की संस्तुतियों के अनुसार शासन ने इसे 10 वर्ष की सेवा पूरी करने पर पहली, 16 वर्ष की सेवा पूरी करने पर दूसरी और 26 साल की सेवा पूरी करने पर तीसरी एसीपी देने की व्यवस्था कर दी।
सामने आ गई विसंगति
इसके तहत पूर्व की व्यवस्था में 24 साल की सेवा पर दूसरी एसीपी पाने वालों को नई व्यवस्था के अनुसार 26 साल की सेवा पूरी करने वर तीसरी एसीपी देने का फैसला कर दिया। मगर 14 वर्ष की सेवा पर पहली एसीपी पाने वालों को दूसरी एसीपी देने से जुड़े प्रस्ताव में विसंगति पैदा हो गई।
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इसके अंतर्गत दूसरी एसीपी के लिए पहले एसीपी से छह वर्ष का अंतर माना जाने लगा। यानी पहली एसीपी जो 14 साल की सेवा पर मिली थी, उसे 10 वर्ष मानकर दूसरी एसीपी छह साल बाद देने की व्याख्या की जाने लगी। इसकी वजह से कर्मचारियों को दूसरी एसीपी 16 वर्ष की जगह 20 वर्ष की सेवा पूरी करने पर मिलती।
समस्याओं पर हुई थी चर्चा
कर्मचारी इस विसंगति को दूर करने की मांग कर रहे थे। हाल ही में प्रमुख सचिव कार्मिक राजीव कुमार की अध्यक्षता में वित्त, चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य व नगर विकास विभाग आदि के अधिकारियों के साथ बैठक में कर्मचारियों की विभिन्न लंबित समस्याओं पर चर्चा हुई।
इसमें कर्मचारी-शिक्षक संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष वीपी मिश्र के अलावा कर्मचारी नेता एसपी तिवारी, सतीश कुमार पांडेय, रामराज दूबे, जेएन तिवारी व आरकेमिश्र आदि उपस्थित थे।
मिश्र के अनुसार बैठक में प्रमुख सचिव राजीव कुमार ने मुख्य सचिव जावेद उस्मानी के साथ हुई बैठक का हवाला देते हुए बताया कि 16 वर्ष की सेवा पूरी करने पर दूसरी एसीपी देने में कायम विसंगति दूर करने पर सहमति बन गई है।
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अब 14 वर्ष पर पहली एसीपी पा चुके कर्मचारी दो वर्ष की सेवा पूरी करते ही दूसरी एसीपी के हकदार मानेे जाएंगे। इस संबंध में प्रस्ताव जल्दी ही कैबिनेट को भेजा जाएगा। प्रमुख सचिव ने दीपावली के पहले इस संबंध में आदेश जारी कराने का आश्वासन दिया है।
चिकित्सा परिचर्या नियमावली पर भी मुहर जल्द
प्रदेश सरकार कर्मचारियों की एक अन्य मांग भी जल्दी ही पूरी करने की तैयारी कर रही है। प्रदेश के राज्य कर्मचारियों को इलाज में सुविधा से जुड़ी चिकित्सा परिचर्या नियमावली को जल्दी ही कैबिनेट से मंजूरी दिलाने का प्रस्ताव है।
इसके अंतर्गत कर्मचारी बीमारी के दौरान यदि प्राइवेट अस्पताल में भी इलाज कराएंगे तो उन्हें उसकी प्रतिपूर्ति मिल सकेगी। वर्तमान में कर्मचारी यदि प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराना चाहता है तो उसे इसके लिए सरकारी अस्पताल से रेफर करवाने की मजबूरी है।
कर्मचारियों का तर्क था कि हृदय रोग, कैंसर व दुर्घटना की दशा में सरकारी अस्पताल ले जाने की औपचारिकता निभाना खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसे में कई बार गंभीर बीमारियों में जब कर्मचारी को सर्वाधिक मदद की जरूरत होती है वह इस शर्त की वजह से लाभ से वंचित रह जाता है।
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