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बचकर रहिए, राजाजीपुरम में बिल्डर बेच रहा आवास विकास की जमीन, फंस सकते हैं आप

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राजाजीपुरम में आवास विकास परिषद की इसी जमीन को बेच रहा है बिल्डर।
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लखनऊ। आवास विकास परिषद की राजाजीपुरम योजना में प्राइम लोकेशन की करीब 14 हजार वर्गफीट जमीन बिल्डर प्लॉटिंग कर बेच रहा है। इसे अवैध करार देते हुए परिषद ने मौके पर नोटिस चस्पा करने के साथ बोर्ड भी लगा दिया है। इसमें खरीदारों को आगाह करते हुए लिखा गया है कि प्लॉटों की किसी भी प्रकार से खरीद-फरोख्त व निबंधन अवैध होगा, जिसके लिए आवास विकास परिषद जिम्मेदार नहीं होगा।
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अधिशासी अभियंता शशांक पांडेय ने बताया कि परिषद की राजाजीपुरम योजना वर्ष 1971 में शुरू हुई थी। तब ग्राम बिहारीपुर के खसरा संख्या-290, 293, 299, 300, 301, 302, 305, 311, 314, 315 व 319 की जमीन भी अधिग्रहीत हुई थी। इन्हीं खसरा नंबरों की भूमि पर बल्क सेल भूखंड संख्या 10 बीएस-1 व 10 बीएस-2 नियोजित है। इन्हें 1997 में जयशंकर सहकारी समिति के नाम आवंटित किया गया था, लेकिन अब तक न तो जमीन का पैसा आवंटी ने जमा किया और न ही परिषद की ओर से जमीन का कब्जा दिया गया। ऐसे में जमीन पर सोसाइटी का कोई अधिकार नहीं है। इसके बाद भी सोसाइटी के अध्यक्ष रियासत नवाब रिजवी की ओर से जमीन को अवैध रूप से बेचने का प्रयास किया जा रहा है।
देते रहे रियायत, बेचने पर नहीं दिया जोर
परिषद ने सोसाइटी के नाम जमीन का आवंटन करीब 24 साल पहले किया था। आवंटी ने पैैैसा जमा नहीं किया और परिषद भी उसे राहत देता रहा। दूसरे को जमीन न बेचने से परिषद की करोड़ों की जमीन पचड़े में फंसी रही। जमीन क्यों नहीं बेची गई, इस पर अधिशासी अभियंता का कहना है कि जमीन का आवंटन कर उसे बेचा तो गया, लेकिन आवंटी ने इसका पैसा नहीं जमा किया। ऐसे में जितना लंबा समय पैसा बकाया रहा, उस पर ब्याज लगने लगा। बाद में ब्याज पर भी ब्याज लगा तो आवंटी ने पैैैसा नहीं जमा किया और मामला लटकाए रखने को दांव-पेंच कर कागजी कार्यवाही जारी रखी।
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ओटीएस में भी नहीं जमा किया पैसा
ब्याज से आवंटी को राहत देने के लिए शासन की ओर से एकमुश्त समाधान योजना कई बार लाई गई। बीते माह ही योजना शुरू की, लेकिन करोड़ों की इस जमीन का पैैसा नहीं जमा हुुआ। अब योजना भी खत्म हो गई है। ऐसे में आवंटी को पूरा पैसा जमा करना होगा। इस समय जमीन की कीमत करीब 60 हजार रुपये प्रतिवर्ग मीटर है। कुल जमीन की कीमत करीब आठ करोड़ रुपये बनती है। इस पर सोसाइटी अध्यक्ष रियासत नवाब रिजवी ने कहा कि आवास विकास को अभी पैसा देना है। जब प्लॉट बिकेंगे, तभी तो पैैसा देंगे। किसी को धोखे में नहीं रख रहे हैं। पुश्तैनी जमीन है। परिषद प्रशासन से दो दिन पहले भी बात हुई थी। वह नहीं माने तो बोर्ड लगा गए। वहीं, अधिशासी अभियंता शशांक पांडेय ने कहा कि जमीन आवास विकास की है। 1997 में सोसाइटी को आवंटन हुआ था, पर न तो उसका पैैसा जमा हुआ और न ही कब्जा दिया गया। इसके बाद भी अवैध रूप से प्लॉटिंग कर जमीन बेची जा रही है।
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