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बजट : महिलाओं की नहीं पूरी हुईं उम्मीदें

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बजट
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लखनऊ। केंद्रीय बजट देश की आर्थिक प्रगति का खाका पेश करता है, लेकिन इसका असली पैमाना आम आदमी की रसोई और बचत है। घर की प्रबंधक होने के नाते गृहणियां इन नीतिगत घोषणाओं को अपनी दैनिक चुनौतियों और भविष्य की सुरक्षा के तराजू पर तौल रही हैं। कुछ महिलाएं खुश हैं, तो कुछ ने निराशा व्यक्त की है। अधिकतर महिलाओं को उम्मीद थी कि घरेलू गैस और तेल की दरों में राहत मिलेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इससे वे निराश नजर आईं।
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रसोई को नहीं मिला कोई लाभ
बजट में गृहिणियों के लिए कुछ नया नहीं रहा। हर बार उम्मीद होती है कि शायद इस साल रसोई का बोझ कम होगा, पर गैस और तेल की कीमतें जस की तस हैं। सरकार ने टैक्स में राहत तो दी, पर महंगाई ने उसे बराबर कर दिया। इस बजट से रसोई कुछ लाभ नहीं मिला।
-सुमिता सिद्धार्थ, एडिटर, इनरव्हील क्लब, वृंदावन कॉलोनी


स्टोरेज के लिए नए इंफ्रास्ट्रक्चर की घोषणा अच्छी
सब्जियों और अनाज के स्टोरेज के लिए नए इंफ्रास्ट्रक्चर की घोषणा अच्छी है। इससे साल भर कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव पर लगाम लगेगी। रसोई के बजट को स्थिर रखने की दिशा में यह एक दूरगामी सोच है।
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- रचना गुप्ता, गृहिणी, निशातगंज

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गृहिणियों के लिए निराशाजनक बजट

अगर एक गृहिणी के रूप मैं बजट को देखूं तो कुछ खास नहीं रहा। लगा भी था, क्योंकि चुनाव में अभी समय है, अगर चुनाव नजदीक होता तो शायद कुछ खास किया जाता महिलाओं के लिए। बजट शहर की घरेलू महिलाओं के लिए तो निराशाजनक है।

- डॉ. रेनू वर्मा, विवेकखंड, गोमतीनगर
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महिलाओं के हित में बजट
लखपति दीदी योजना का विस्तार और महिलाओं को मिलने वाले सस्ते लोन ने पंख दिए हैं, लेकिन खाद्य तेल और मसालों पर आयात शुल्क कम होने और एलपीजी के दाम कम नहीं हुए। हालांकि, टैक्स छूट से कुछ पैसे बचेंगे, लेकिन उम्मीद पूरी नहीं हुई।
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- मीना सिंह, अध्यक्ष, सरयू एन्क्लेव
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