परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों का टोटा है। इस नाते प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
विभागीय अफसर चाहें तो इस कमी को दूर कर सकते हैं। बस उन्हें बीटीसी सत्र नियमित करने की जरूरत है।
सत्र नियमित हो जाए तो सरकार को हर साल 20 हजार से 30 हजार बीटीसी प्रशिक्षित मिल सकते हैं। इससे काफी हद तक शिक्षकों की कमी दूर हो सकती है।
बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में शिक्षक रखने की योग्यता स्नातक बीटीसी है।
राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद बीएड वालों को प्राइमरी स्कूलों में रखने की अनुमति एक जनवरी 2013 तक दी थी, लेकिन भर्ती न होने पर राज्य सरकार ने यह अवधि 31 मार्च 2014 तक बढ़वा रखी है।
जानकारों की मानें तो परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों को लेकर जो हाय तौबा मची हुई है उसे बहुत आसानी से दूर किया जा सकता है। इसके लिए बीटीसी सत्र को नियमित करना होगा।
मौजूदा समय सरकारी कॉलेजों में बीटीसी की 10,400 और 458 निजी कॉलेजों में 22,900 सीटें हैं। इसके अलावा 260 निजी कॉलेजों ने संबद्धता के लिए आवेदन कर रखा है। इससे 13,000 सीटें और बढ़ने की संभावना है। इसके बाद भी सत्र नियमित नहीं हो पा रहा है।
इसके पीछे मुख्य वजह राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के पास बीटीसी प्रशिक्षण देने के लिए किसी नियमावली का न होना है।
बस शासन स्तर पर एक कैलेंडर तैयार किया गया है कि निजी क्षेत्र में कॉलेजों को संबद्धता देते हुए एक अक्तूबर से सत्र शुरू कर दिया जाएगा। पिछले साल का सत्र फरवरी 2013 में शुरू हुआ था। इस बार भी सत्र लेट हो सकता है।
वजह, निजी क्षेत्र के 260 कॉलेजों को इसी सत्र में संबद्धता देते हुए प्रवेश प्रक्रिया पूरी करनी है। प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सत्र नियमित हो सकता है।
इसलिए एससीईआरटी से लेकर शासन तक को इस पर ध्यान देना होगा कि सत्र नियमित करते हुए शिक्षकों की कमी दूर की जाए।