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सड़कों पर उतर 'जनता की लड़ाई' लड़ेंगी मायावती

Thu, 03 Jul 2014 02:49 AM IST
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
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विरोधी दलों की सरकार के खिलाफ सपा, भाजपा और कांग्रेस के बाद अब बसपा भी सड़क पर उतरने की तैयारी कर रही है।
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बसपा प्रदेश में कानून-व्यवस्था व भ्रष्टाचार तथा केंद्र के महंगाई बढ़ाने वाले फैसलों के खिलाफ सड़क पर उतरने की रणनीति बना रही है।

पार्टी विधानमंडल सत्र के दौरान ही विधानमंडल का घेराव जैसे कार्यक्रम का ऐलान कर सकती है।

भाजपा ने बदला माहौल

बताते चलें प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी होने के बावजूद बसपा प्रदेश की कानून-व्यवस्था और केंद्र के महंगाई से जुड़े फैसलों के खिलाफ सदन से लेकर सड़क तक की लड़ाई में पिछड़ती नजर आ रही है।

विधानमंडल के बजट सत्र में सदन के भीतर भाजपा कानून-व्यवस्था व भ्रष्टाचार के खिलाफ सपा सरकार से मोर्चा लेती नजर आई तो सड़क पर भी उसने सपा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

एक सप्ताह तक चलने वाले आंदोलन की आक्रामक शुरुआत कर पार्टी ने प्रदेश में माहौल ही गर्मा दिया है।

दूसरी ओर सपा कार्यकर्ताओं ने महंगाई के खिलाफ भाजपा प्रदेश मुख्यालय के सामने प्रदर्शन कर ताकत दिखाई तो कांग्रेस भी बुधवार को सड़क पर उतर आई।

हिंसक संघर्ष नहीं करेगी पार्टी

बसपा के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि उनकी पार्टी भाजपा और सपा जैसे हिंसक संघर्ष का रास्ता अख्तियार नहीं कर सकती।

ये दोनों ही दल सत्ता के मद में बौराकर कानून-व्यवस्था के लिए खुद ही समस्या बनते जा रहे हैं। बसपा सदन के भीतर विपक्षी दल की जिम्मेदार भूमिका निभा रही है तो सड़क के बाहर भी जनहित से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेनकाब करने की तैयारी कर रही है।

बसपा नेता ने बताया कि प्रदेश की बदतर कानून-व्यवस्था व भ्रष्टाचार तथा केंद्र की महंगाई बढ़ाने वाली नीतियों के खिलाफ पार्टी जल्दी ही सड़क पर उतरेगी।
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कभी सड़क पर नहीं किया संघर्ष

विधानमंडल के मौजूदा सत्र के दौरान विधानभवन घेराव जैसे कार्यक्रम से प्रदेश व केंद्र की जनविरोधी सरकारों को बेनकाब किया जाएगा।

बताते चलें बसपा धरना-प्रदर्शन जैसे आंदोलनों से बचती रही है। सत्ता से बाहर होने के बाद दो वर्ष हो गए, पार्टी कभी सड़क पर नहीं उतरी।

पर, बसपा सुप्रीमो मायावती द्वारा बदायूं जाकर दो बहनों के साथ रेप और हत्या के बाद उनके उत्पीड़न पर धरने पर बैठने और मोदी सरकार की गरीब विरोधी नीतियों के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी के बाद पार्टी की बदली रणनीति का संकेत मिल गया था। अब पार्टी उसी ओर बढ़ती नजर आ रही है।
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