मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने केंद्र से प्रदेश को सेंट्रल पूल से मिलने वाली बिजली के आवंटन में किए जा रहे भेदभाव को खत्म करने का अनुरोध किया है।
उन्होंने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्यों को बिजली आवंटन के मौजूदा मानकों में बदलाव करने का भी अनुरोध किया है।
साथ ही प्रदेश की मौजूदा व प्रस्तावित बिजली परियोजनाओं की समस्याओं व बाधाओं को दूर कराने की मांग की है।
इस आधार पर राज्यों को मिलती है बिजली
इसके अलावा कोयले की अनुपलब्धता एवं खराब गुणवत्ता, ट्रांसमिशन लाइनों के निर्माण में आ रही अड़चनों तथा पर्यावरण संबंधी अनुमतियों में हो रही देरी पर भी प्रधानमंत्री का ध्यान आकृष्ट कराते हुए सहयोग की अपेक्षा की हैं।
सीएम ने पीएम को लिखे पत्र में कहा है कि अप्रैल 2000 से सेंट्रल पूल से राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को गाडगिल फार्मूले के तहत बिजली आवंटित की जाती है।
इसमें 85 फीसदी बिजली का निश्चित आवंटन होता है जबकि 15 फीसदी बिजली का आवंटन केंद्र आकस्मिकता व समग्रता को ध्यान में रखते हुए करती है। वहीं बिजली का आवंटन में राज्य की जनसंख्या को ध्यान में रखा जाता है।
यूपी को मिले सबसे ज्यादा बिजली
अखिलेश ने कहा कि यूपी देश का सर्वाधिक जनसंख्या वाला प्रदेश है, लिहाजा राज्य को सेंट्रल पूल से सर्वाधिक बिजली मिलनी चाहिए।
जबकि यूपी से जनसंख्या में आधे से कम दिल्ली को 5788 मेगावाट बिजली का आवंटन किया जाता है। इसी तरह यूपी से जनसंख्या में काफी कम महाराष्ट्र को 6396 मेगावाट आवंटित की जा रही है।
इससे साफ है कि सेंट्रल पूल से बिजली आवंटन में यूपी के साथ भेदभाव किया जा रहा है।
सीएम ने कहा कि राज्यों को बिजली आवंटित करते समय मांग में बढ़ोतरी, मौसम और सिंचाई संबधी जरूरतों पर भी विचार किया जाना चाहिए।
कोल ब्लॉक की बाधाएं दूर कराएं
मुख्यमंत्री ने बताया कि सूबे की तीन अहम बिजली परियोजनाएं 1320 मेगावाट की ओबरा सी, 660 मेगावाट की हरदुआगंज व 1320 मेगावाट की जवाहरपुर उड़ीसा स्थित चंदीपाड़ा व चंदीपाड़ा-2 कोल ब्लॉक से मिलने वाले कोयले पर आधारित हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि इस कोल ब्लॉक में आने वाली बाधाओं का शीघ्र समाधान कराया जाए ताकि परियोजनाएं प्रभावित न हो।
घाटमपुर बिजलीघर को दिलाएं पर्यावरणीय मंजूरी
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से ग्वालियर से जयपुर और अनपरा से उन्नाव तक खींची जा रही 765 केवी ट्रांसमिशन लाइनों को नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्ड लाइफ से अनुमति दिलाए जाने की मांग की।
ताकि इस लाइन के चालू होने से सूबे की बिजली समस्या पर काफी हद तक काबू पाया जा सके। साथ ही उन्होंने कानपुर के घाटमपुर में स्थापित किए जा रहे 1980 मेगावाट के बिजलीघर को पर्यावरणीय मंजूरी दिलाने का अनुरोध किया है।