बसपा ने अपने कोऑर्डिनेटरों को कांग्रेस को दलित विरोधी साबित करने के लिए राज्यव्यापी मुहिम चलाने का निर्देश दिया है।
इसके लिए बसपा नेता गांव-गांव व हर कस्बे में जाकर दलित नेता जगजीवन राम को प्रधानमंत्री न बनने देने से लेकर डॉ. अंबेडकर की राह में कांग्रेस की ओर से मुश्किलें खड़ी करने के किस्से तो सुनाएंगे।
इसके साथ ही कांग्रेस शासित राज्यों में से एक में भी दलित मुख्यमंत्री न बनाने की बात भी बताएंगे।
दरअसल, सात अक्तूबर को राहुल गांधी ने दिल्ली में एक कार्यक्रम में आरोप लगाया था कि कांशीराम ने दलितों को मजबूत करने का काम किया था, वहीं मायावती ने दलित आंदोलन के नेतृत्व पर कब्जा कर रखा है और दूसरों को आगे बढ़ने का मौका नहीं देती हैं।
बसपा सुप्रीमो ने दो दिन बाद पलटवार करते हुए कांग्रेस को दलित विरोधी करार दिया था। बसपा के एक वरिष्ठ कोऑर्डिनेटर बताते हैं कि हाल में पार्टी ने प्रदेश भर के कोऑर्डिनेटरों की एक बैठक बुलाई थी।
इसमें चुनावी तैयारी की समीक्षा के अलावा निर्देश दिया गया कि गांव-गांव, कस्बा-कस्बा व चट्टी-चौराहों पर पहुंच बढ़ाकर कांग्रेस की दलित विरोधी मानसिकता की बखिया उधेड़ी जाए।
बसपा प्रदेश अध्यक्ष राम अचल राजभर से लेकर राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी व स्वामी प्रसाद मौर्य तक ने कई उदाहरण देकर बताए कि किस तरह कांग्रेस ने दलित नेतृत्व को कभी आगे नहीं बढ़ने दिया।
अब पार्टी पदाधिकारियों ने इस निर्देश के अनुसार अपनी बैठकों में अपने कार्यकर्ताओं को इस बारे में समझाने व रणनीति के तहत गांव-गांव जाकर इसे मतदाताओं को बताने का काम शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि दलितों में बिखराव रोकने के लिहाज से बासपा ने यह योजना बनाई है।
मोदी को पिछड़ा विरोधी साबित करने पर भी जोर
कांग्रेस को दलित विरोधी साबित करने के अलावा पार्टी भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को पिछड़ा विरोधी साबित करने में जुटेगी।
पार्टी कार्यकर्ता लोगों के बीच जाकर बताएंगे कि किस तरह गुजरात का नेतृत्व करने वाले सर्वाधिक प्रभावशाली जातियों में से एक पटेल नेताओं को मोदी ने किनारे लगा दिया। पटेल के बहाने पार्टी कुर्मी वोटरों को भाजपा से दूर छिटकाना चाहेगी। इसमें केशुभाई पटेल का उदाहरण दिया जाएगा।