बसपा ने लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन में अपने कोटे की बची 16 सीटों पर प्रत्याशियों का एलान कर दिया है। पार्टी ने पूर्वांचल में बाहुबलियों पर भरोसा जताया है। साथ ही समीकरण के हिसाब से सोशल इंजीनियरिंग की भी कोशिश की है। मायावती ने माफिया मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी को गाजीपुर से केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा के सामने प्रत्याशी बनाया है। अफजाल यहां से एक बार सांसद रह चुके हैं।
बसपा ने अतुल राय को घोसी से टिकट दिया है। इनका भी मुख्तार से करीबी रिश्ता बताया जाता है। बाहुबली और पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी के बड़े बेटे भीष्म शंकर उर्फ कुशल तिवारी एक बार फिर संतकबीरनगर से भाग्य आजमाएंगे। वह सांसद रहे हैं। सुल्तानपुर में केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के सामने दबंग छवि के चंद्रभद्र सिंह को प्रत्याशी बनाया गया है। दो रिटायर्ड अफसरों को भी टिकट बसपा ने पूर्व विधायक टी. राम को मछलीशहर सुरक्षित सीट से प्रत्याशी बनाया है। टी. राम लंबे समय तक लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता व विभागाध्यक्ष रहे हैं। इसी तरह रिटायर्ड आईएएस अधिकारी श्याम सिंह यादव को जौनपुर से प्रत्याशी बनाया गया है। यादव यूपी राइफल एसोसिएशन के चेयरमैन भी हैं।
पश्चिम में मुस्लिम-एससी, पूर्वांचल में पिछड़ा-ब्राह्मण पर जोर
बसपा ने पश्चिमी यूपी में टिकट वितरण में मुस्लिम व अनुसूचित जातियों के समन्वय पर ध्यान दिया था। पूर्वी यूपी में सोशल इंजीनियरिंग पर लौट आई है। पार्टी ने तीन सुरक्षित सीटों बांसगांव से पूर्व मंत्री सदल प्रसाद, लालगंज से संगीता आजाद (लालगंज विधायक आजाद अरिमर्दन की पत्नी) और मछलीशहर से टी. राम के अलावा चार-चार ब्राह्मण व पिछड़ा वर्ग के प्रत्याशी उतारे हैं। संतकबीरनगर से कुशल तिवारी, प्रतापगढ़ से अशोक त्रिपाठी, अंबेडकरनगर से रितेश पांडेय और भदोही से पूर्व मंत्री रंगनाथ मिश्र को टिकट दिया है।
पिछड़ा वर्ग से बसपा प्रदेश अध्यक्ष आरएस कुशवाहा को सलेमपुर, पूर्व मंत्री राम प्रसाद चौधरी (कुर्मी) को बस्ती, श्रावस्ती से राम शिरोमणि वर्मा (कुर्मी) और जौनपुर से श्याम सिंह यादव को उतारा गया है। पार्टी ने दो मुस्लिम प्रत्याशी उतारे हैं। इनमें गाजीपुर से अफजाल अंसारी और डुमरियागंज से आफताब आलम शामिल हैं। वैश्य समाज से देवरिया से विनोद कुमार जायसवाल तथा भूमिहार से अतुल राय को घोसी से मौका मिला है।
अब एससी के साथ पिछड़ों को तवज्जो
बसपा ने अपनी 38 सीटों में सोशल इंजीनियरिंग का नया प्रयोग किया है। कभी ब्राह्मण-मुस्लिम और एससी (बीएमडी) को तवज्जो की सोशल इंजीनियरिंग करने वाली बसपा ने इस बार एससी-ओबीसी को 10-10 सीटें दी हैं। जिताऊ प्रत्याशी के रूप में ब्राह्मण व मुस्लिम व अन्य वर्ग को मौका मिला है। 38 में 10 सुरक्षित सीटों पर एससी, 10 पिछड़ों में 4 कुर्मी, 2-2 यादव व गूजर तथा 1-1 कुशवाहा व जाट हैं। 6-6 ब्राह्मण और मुस्लिम तथा 3 वैश्य, 2 ठाकुर व 1 भूमिहार को टिकट मिला है।
राजनीति को सही दिशा देने की जिम्मेदारी राजनीतिज्ञों पर है। वे उदासीन बने रहे तो मतदाताओं ने बाहुबलियों को वोट के जरिए हतोत्साहित करना शुरू किया। यही कारण है कि इस बार कई दलों ने बाहुबलियों को टिकट देने में संकोच किया। फिर भी, कुछ दलों ने सिर्फ जीत के लिए बाहुबलियों को तवज्जो दी है। मतदाताओं की जिम्मेदारी है वे स्वस्थ लोकतंत्र में अपनी भूमिका निभाएं।
-प्रो. एसके द्विवेदी, राजनीतिशास्त्री