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खुद के जाल में फंसे बसपाई, अब झांक रहे बगलें!

Fri, 21 Nov 2014 10:27 AM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
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विधान परिषद में गुरुवार को बसपा अपने ही उठाए गए मुद्दे में उलझ गई। सरकार की तरफ से सदन में दी गई सूचना के अनुसार बुधवार को बसपा सदस्यों ने अपनी राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती के घर के सामने से जिस निर्माण को हटाने की मांग की थी, उसे खुद बसपा ने सत्ता में रहते हुए बनवाया था।
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नेता सदन अहमद हसन ने बताया कि यह निर्माण माल एवेन्यू पुल के लिए नहीं किया गया था, बल्कि खुद तत्कालीन बसपा सरकार ने 1 करोड़ 70 लाख 55 हजार रुपये खर्च करके 2011 में जन सुविधा के नाम पर यह निर्माण कराया था।

हसन ने चुटकी भी ली कि समझ में नहीं आता कि पांच साल में इन्होंने जो किया है, उसे पटरी पर हम लाएं भी तो कैसे? हसन ने बताया कि प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग की अध्यक्षता में एक समिति गठित कर दी गई है, जो 15 दिन में रिपोर्ट देगी। समिति की सिफारिशों पर एक महीने के भीतर अमल करा दिया जाएगा।
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ये बनवाने पर लाखों खर्च करें और हम गिराने पर

हसन ने नेता प्रतिपक्ष नसीमुद्दीन सिद्दीकी की तरफ इशारा करते हुए कहा, ‘मंत्रीजी ने ही बनवाया होगा। तब तो इन्हें इसमें जनहित दिखा। अब जनहित का सवाल कैसे खत्म हो गया?

ऐसी चीज बनवाई ही क्यों जिससे भविष्य में दिक्कत हो सकती थी। ये बनवाने पर पौने दो करोड़ खर्च करें और अब हम उसे गिराने पर एक करोड़ खर्च करें’।

पुलिस चौकी या थाना बनाने पर विचार
नेता सदन ने कहा कि समिति इस अस्थायी निर्माण के संबंध में सिफारिशें देगी कि इसे ठीक कराकर पुलिस चौकी या थाना के रूप में इस्तेमाल करने के लिए दे दिया जाए या फिर इसे ध्वस्त करा दिया जाए।
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रिपोर्ट पर हुआ बवाल, ये है पूरा मामला

नेता प्रतिपक्ष के पूछने पर नेता सदन ने कहा कि एक महीने में समिति की रिपोर्ट मिल जाएगी। इस पर सभापति गणेश शंकर पांडेय ने कहा, ‘नेता सदन! यह स्थान शहर के भीतर है। इसमें एक महीना कहां लगेगा?’ नेता सदन ने कहा, ‘ठीक है 15 दिन तो लग ही जाएंगे।'

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि टालने वाला काम न करें। नेता सदन ने कहा, ‘ठीक है। समिति की सिफारिशों पर एक महीने में अमल करा देंगे।’ सभापति ने नेता सदन से कहा कि समिति को निर्देश दे दिया जाए कि वह नेता प्रतिपक्ष से भी बातचीत कर ले।

यह है मामला
बुधवार को बसपा की तरफ से सरकार पर आरोप लगाया गया था कि सरकार ने माल एवेन्यू पुल के निर्माण के लिए कुछ अस्थायी निर्माण कराए थे, पर पुल चालू होने के बावजूद इसे जान-बूझकर नहीं हटाया गया।

इससे बसपा अध्यक्ष मायावती की सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न हो गया है, पर गुरुवार को जब नेता सदन ने तथ्य रखे तो नेता प्रतिपक्ष रक्षात्मक मुद्रा में यह कहते दिखे कि सरकार इसे ध्वस्त करे या रखे, इस पर उन्हें कुछ नहीं कहना, पर खंडहर न रहे।
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