मायावती ने कहा, जनता के दुख, तकलीफ बढ़ते जा रहे हैं। गंभीर राजनीतिक, आर्थिक व सामाजिक संकट से भयंकर गरीबी व बेरोजगारी है। ऐसे ही हालात जनता ने पहले कांग्रेस की सरकारों में भी देखे और झेले हैं।
केंद्र की भाजपा सरकार भी अब कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों के ही रास्तों पर चल रही है। राजनीतिक व व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए सत्ता का घोर दुरुपयोग कर रही है। उसने जनहित, जनकल्याण व व्यापक देशहित के मुद्दों को ताक पर रख दिया है। नतीजतन, गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी, हिंसा, तनाव, नफरत व अराजकता का ही माहौल बना हुआ है।
एक ही थैली के चट्टे-बट्टे कांग्रेस-भाजपा
मायावती ने कहा, कांग्रेस व भाजपा एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं। बसपा इनसे पूरी दूरी बनाकर मुद्दों पर गुण व दोष के आधार पर ही केंद्र सरकारों को समर्थन देती है। यही वजह है कि आग्रह के बावजूद बसपा केंद्र की किसी भी पार्टी की सरकार में शामिल नहीं हुई है।
बसपा सुप्रीमो ने कहा कि कांग्रेस को, देश व समाज की बदहाली के मामले में भाजपा की आलोचना करने का नैतिक अधिकार नहीं है। कांग्रेस जब भाजपा सरकार की आलोचना करती है तो लोगों के दिलो-दिमाग पर उसका जल्द असर नहीं पड़ता।
इसका मतलब भाजपा सरकार को यह कतई नहीं समझना चाहिए कि केवल कांग्रेस से अपनी सरकार की तुलना करके वह जनता की पैनी जांच-परख से बच जाएगी। भाजपा यदि कांग्रेस के ही पैटर्न पर लगातार चलती रही तो राज्यों से एक-एक करके विदा होने के बाद उसकी स्थिति कांग्रेस से भी कहीं बदतर हो जाएगी। भाजपा व कांग्रेस में झूठ बोलने की घिनौनी राजनीति चल रही है।
बसपा सुप्रीमो ने कहा, केंद्र व राज्य सरकारों के ज्यादातर बड़े-बड़े सरकारी काम इनके चहेते बड़े-बड़े उद्योगपतियों को ही दिए जा रहे हैं। इन कामों में एससी-एसटी और ओबीसी आरक्षण की कोई व्यवस्था नहीं है। अब इन वर्गों का सरकारी नौकरियों में आरक्षण नाम मात्र के लिए ही बचा रह गया है। इसे लेकर बसपा काफी ज्यादा चिंतित है।
किसानों की भी हालत बहुत ज्यादा खराब हो चुकी है। उन्होंने बसपा नेताओं व कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए कि वे अति-गरीबों, असहाय व कमजोर वर्गों, मुसीबतों से घिरे नौजवानों, छात्र-छात्राओं व दूसरे जरूरतमंद लोगों की ज्यादा से ज्यादा मदद करें।
लखनऊ व नोएडा में पुलिस कमिश्नर प्रणाली संबंधी सवाल पर मायावती ने कहा कि जब तक सरकार दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम नहीं करेगी, तब तक ऐसे कदम उठाने का कोई लाभ जनता को नहीं मिलने वाला है। दृढ़ इच्छाशक्ति से ही कानून-व्यवस्था बेहतर की जा सकती है।
प्रदेश सरकार में अभी तक यह इच्छाशक्ति नहीं दिखाई पड़ी है। इसके बिना हजार कदम उठा लें, लॉ एंड ऑर्डर सुधरने वाला नहीं है। यह किसी से छिपा नहीं है कि यूपी में कानून का राज नहीं बल्कि जंगलराज है। मां-बहनों की इज्जत सुरक्षित नहीं है।
बसपा सुप्रीमो ने कहा, मैंने अपनी सरकार में कानून हाथ में लेने वाले अपने एमपी, एमएलए को भी नहीं छोड़ा था। क्या भाजपा सरकार भी अपनी पार्टी के सांसदों, विधायकों व अन्य आपराधिक तत्वों पर सख्त कानूनी कार्रवाई करके दिखा सकती है?