फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

क्लैट पीजी में राजधानी की समृद्धि को पहली रैंक, यूजी में सार्थक को 23वीं, सृष्टि को 31वीं एआईआर

विज्ञापन
विज्ञापन
देश के राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए आयोजित कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (क्लैट) में राजधानी के मेधावियों ने अपना जलवा दिखाया है।
विज्ञापन

एक तरफ जहां पीजी में राजधानी की समृद्धि मिश्रा को ऑल इंडिया पहली रैंक मिली है। वहीं यूजी में सार्थक अग्रवाल को 23वीं, उदय आदित्य बनर्जी को 29वीं, सृष्टि अग्रवाल को 31वीं, देवांश श्रीवास्तव को 100वीं ऑल इंडिया रैंक मिली है।
इसके साथ ही सूर्यांश सिंह चौहान को 195वीं, अरशव देव सिंह को 484वीं, स्पर्श तिवारी को 586 व विनायक गुप्ता को 724वीं ऑल इंडिया रैंक मिली है।
राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए क्लैट का आयोजन पिछले रविवार 19 जून को किया गया था और एक ही हफ्ते में इसका परिणाम जारी कर दिया गया।
गत वर्ष की अपेक्षा इस बार राजधानी का परिणाम बेहतर रहा है और काफी मेधावियों ने अच्छी रैंक भी पाई है। इसे लेकर मेधावी भी उत्साहित हैं कि पसंद के विधि विश्वविद्यालयों में दाखिला मिल सकेगा।
विज्ञापन

सफल छात्रों को 27 जून की मध्यरात्रि तक ऑनलाइन कराना है पंजीकरण
देश के 22 राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए होने वाली प्रवेश परीक्षा क्लैट का रिजल्ट जारी होने के साथ ही काउंसिलिंग की प्रक्रिया भी शनिवार से शुरू हो गई। परीक्षा में सफल छात्रों को 27 जून की मध्यरात्रि तक ऑनलाइन पंजीकरण कराना है। इसमें सामान्य वर्ग के छात्रों को 30 हजार और एसटी व एससीए ओबीसी व अन्य वर्ग के छात्रों को 20 हजार रुपये ऑनलाइन जमा कराने होंगे। प्रत्येक छात्र को कम से कम पांच राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय का विकल्प चुनने की सलाह दी गई है। 30 जून को पहली एलॉटमेंट सूची जारी होगी। इसके बाद दो जुलाई तक छात्रों को सीट लॉक कर डॉक्यूमेंट अपडेट करने होंगे और विधि विश्वविद्यालय की फीस जमा करनी होगी। इस प्रकार 19 जुलाई तक 5 अलॉटमेंट सूची जारी की जाएगी। 20 जुलाई तक काउंसिलिंग की प्रक्रिया संपन्न कराई जाएगी।
न्याय के लिए नहीं करना होगा लंबा इंतजार :
समृद्धि मिश्रा, एआईआर 01
न्याय का प्रोफेशन ग्लोबल प्रोफेशन है। इसलिए विद्यार्थियों के लिए काफी स्कोप होता है। मेरा मानना है कि कई वजहों से अभी भी छोटे-छोटे मामलों में न्याय पाने में काफी वक्त लगता है। इस पेंडेंसी को कम करना प्राथमिकता होगी और लोगों को लंबा इंतजार नहीं करना होगा। ज्यादा से ज्यादा मॉक टेस्ट देना चाहिए और लॉ के बेसिक क्लियर करना चाहिए। एक साल के निर्णयों को फॉलो करना चाहिए। मैंने अलीगंज केंद्रीय विद्यालय से हाईस्कूल व इंटर, लविवि से एलएलबी और बीएचयू से एलएलएम किया है। पीसीएस जे की तैयारी कर रही हूं और जज बनना चाहती हूं। पिता सर्वेश कुमार हाईकोर्ट में अधिवक्ता और मां उमा मिश्रा भाजपा महिला मोर्चा में नगर मंत्री हैं।
10वीं से ही शुरू करें तैयारी
सार्थक अग्रवाल, एआईआर 23वीं
मैंने 10वीं से ही थोड़ी-थोड़ी क्लैट की तैयारी शुरू कर दी थी और इसका फायदा भी मिला। पहले प्रयास में ही अच्छी रैंक प्राप्त की। शुरुआती दौर में रीडिंग स्पीड व कंप्रिहेंसिव पर फोकस किया। साथ ही अंग्रेजी और जीके लीगल पर फोकस करना चाहिए। ज्यूडीशयरी के क्षेत्र में ही कॅरिअर बनाना है। इसके माध्यम से पेंडिंग केसों की संख्या को कम करने का प्रयास करूंगा। इस क्षेत्र में ऑटोमेशन की संभावनाएं कम हैं। पिता मनीष अग्रवाल इंजीनियर व मां संगीता अग्रवाल गृहिणी हैं।
ग्रुप स्टडी काफी फायदेमंद
उदय आदित्य बनर्जी, एआईआर 29वीं
क्लैट की तैयारी के लिए मॉक टेस्ट काफी महत्वपूर्ण होता है। ग्रुप स्टडी से भी फायदा मिलता है और एक-दूसरे की कमजोरी भी पता चलती है। बहुत सारे अनुभव भी मिलते हैं। बहुत सारे लोगों को यह भ्रम रहता है कि मोबाइल पढ़ाई को प्रभावित करता है, जबकि मैंने 90 फीसदी तैयारी मोबाइल की पढ़ाई से ही की है। इसके लिए हमें खुद पर नियंत्रण बढ़ाना चाहिए। हमें बिना किसी दबाव के तैयारी करनी चाहिए। मैंने एलपीएस आशियाना से हाईस्कूल व इंटर किया है। पिता देवाशीष बनर्जी बैंक मैनेजर व मां इंद्राणी बनर्जी गृहिणी हैं। अभिभावकों ने भी मुझे तैयारी में काफी सहयोग किया।
महिलाओं को लीगल राइट के प्रति करना है जागरूक :
सृष्टि अग्रवाल, एआईआर 31वीं
जितनी संख्या में न्यायपालिका में केस पेंडेंसी है, उससे यह महसूस करता हूं कि जजों की संख्या में वृद्धि होनी चाहिए। वर्कलोड कम करने की जरूरत है। आज भी महिलाएं अधिकारों को लेकर जागरूक नहीं हैं। कोशिश होगी कि उनको कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करूं। मैंने एक साल की ही तैयारी में यह लक्ष्य प्राप्त किया है। शुरुआत में अंग्रेजी, लीगल, मैथ्स की तैयारी करनी चाहिए। जीके का हिस्सा बाद में भी तैयार किया जा सकता है। अपनी तैयारी के साथ शिक्षकों का मार्गदर्शन लेने से भी काफी फायदा होता है। मणिपाल पब्लिक स्कूल से हाईस्कूल व इंटर किया है। पिता नीलेश अग्रवाल पर्यावरणविद व मां मोनिका अग्रवाल गृहिणी हैं।
विज्ञापन

खुद पर भरोसा रखकर करें तैयारी
देवांश श्रीवास्तव, एआईआर 100वीं
मैंने मॉक टेस्ट से काफी तैयारी की और यह लाभदायक रहा। पुराने पेपर भी हल करने से काफी जानकारी व अनुभव मिलता है। क्लैट की तैयारी लगभग दो साल पहले शुरू कर देनी चाहिए क्योंकि आखिर में आप जब बोर्ड में होते हैं तो उसका भी काफी दबाव होता है। इसके साथ खुद पर भरोसा रखकर तैयारी करें। मैं आत्मविश्वासी था कि सफलता मिलेगी। उम्मीद है कि अच्छी यूनिवर्सिटी भी मिलेगी। शुरुआती शिक्षा एलपीएस आशियाना से की है। अभी लॉ स्कूल का अनुभव लेना चाहता हूं। इसके बाद कॅरिअर तय करूंगा। पिता संतोष श्रीवास्तव कारोबारी व मां सुषमा श्रीवास्तव गृहिणी हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें