ब्रेस्ट कैंसर की केवल एक दवा की खरीद पर हम हर साल 2000 रॉल्स रॉयस की कीमत के बराबर पैसा खर्च कर रहे हैं। स्विट्जरलैंड की एक फार्मा कंपनी के इंजेक्शन हरसेप्टिन (ट्रेस्टूज्यूमेव) की महंगी कीमत पर सवाल उठाते हुए केजीएमयू के वीसी प्रो. रविकांत ने सोमवार यह आकलन किया।
उनका कहना था कि अगर भारत में इस दवा का सस्ता विकल्प तैयार कर लिया जाए तो हम हर साल अपनी जरूरत पूरी करने के अलावा 10,000 रॉल्स रॉयस की कीमत की दवा विदेशों में निर्यात कर सकते हैं। केजीएमयू के वीसी, बायोटेक पार्क के वार्षिक समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि शहरी इलाकों में सबसे तेजी से ब्रेस्ट कैंसर बढ़ रहा है। ब्रेस्ट कैंसर को नियंत्रित करने के लिए एक इंजेक्शन हरसेप्टिन दिया जाता है। इस 50 मिली. के एक इंजेक्शन की कीमत करीब 1.25 लाख रुपये भारत में है।
इसे अभी केवल स्विटरलैंड की कंपनी रोश ही बनाती है। वहीं हर साल देशभर में हजारों करोड़ रुपये सिर्फ एक इंजेक्शन की खरीद पर खर्च किए जाते हैं। यह आंकड़ा करीब 8-10 हजार करोड़ रुपये का है। लंग कैंसर और सॉफ़्ट टिश्यू के कैंसर में भी कमोबेश यही स्थिति है।