भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी और महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह ने क्षेत्रीय समन्वयकों के साथ क्षेत्रवार पहले चरण के नगर निगम, नगर पालिकाओं के पैनल पर मंथन शुरू किया। पैनल में शामिल नामों का क्षेत्र की जातीय समीकरण, सामाजिक संतुलन, क्षेत्रीय संतुलन के हिसाब से भी आकलन किया गया।
निकाय चुनाव में भाजपा के विधायक, सांसद और मंत्रियों के परिजन को टिकट नहीं देने के निर्णय के बाद अब सांसद, विधायक और मंत्री अपने करीबियों को टिकट की पैरवी में जुट गए हैं। बृहस्पतिवार को दिनभर भाजपा के सांसद, नेताओं और मंत्रियों ने प्रदेश के बड़े नेताओं से संपर्क कर करीबियों के लिए पैरवी की। उधर, भाजपा प्रदेश मुख्यालय पर दिनभर क्षेत्रवार महापौर, नगर पालिका अध्यक्ष और नगर निगम पार्षद प्रत्याशियों के लिए मिले पैनल पर मंथन हुआ।
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निकाय चुनाव के लिए जिलों में बतौर प्रभारी गए मंत्रियों, पार्टी पदाधिकारियों ने बृहस्पतिवार से अपने क्षेत्र का पैनल प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह को सौंपे। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी और महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह ने क्षेत्रीय समन्वयकों के साथ क्षेत्रवार पहले चरण के नगर निगम, नगर पालिकाओं के पैनल पर मंथन शुरू किया। पैनल में शामिल नामों का क्षेत्र की जातीय समीकरण, सामाजिक संतुलन, क्षेत्रीय संतुलन के हिसाब से भी आकलन किया गया।
सूत्रों का कहना है कि नगर निगम के पार्षद और नगर पालिका के अध्यक्ष पद के लिए पहले चरण के नाम लगभग तय कर लिए हैं। कुछ सीटों पर विवाद और नेताओं के दबाव के चलते फिलहाल निर्णय नहीं हुआ है। सूत्रों का कहना है कि महापौर प्रत्याशी के लिए शुक्रवार को मंथन होगा। महापौर पद के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक की सहमति के साथ आरएसएस से भी हरी झंडी ली जाएगी।
उधर, सूत्रों का कहना है कि आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सांसद अपने करीबियों को निकाय चुनाव में टिकट दिलाना चाहते हैं। विधायक और मंत्री भी क्षेत्र में अपना जनाधार बढ़ाने के लिए करीबी कार्यकर्ताओं की पैरवी कर रहे हैं। विधायक और मंत्री मौजूदा पार्षदों का टिकट कटवाने की भी पैरवी कर रहे हैं। वाराणसी सहित अन्य जिलों से इस तरह के मामले सामने आए हैं।