डेंगू और मलेरिया के बाद अब दिमागी बुखार लोगों के लिए परेशानी का सबब
बना हुआ है। खासतौर पर बच्चे इससे सबसे ज्यादा पीड़ित हैं।
सभी
प्रमुख अस्पतालों में बाल रोग विभाग में ज्यादातर बेड ऐसे ही बच्चों से भरे
हुए हैं। इसके अलावा भी कई मरीज अस्पताल के दूसरे वार्डों में कई सप्ताह
से इलाज करवा रहे हैं।
पार्क रोड स्थित डॉ.
श्यामा प्रसाद मुखर्जी (सिविल) अस्पताल के बाल रोग विभाग में दिमागी बुखार
से पीड़ित 12 बच्चे भर्ती हैं। यहीं भर्ती उन्नाव के अतुल (6) का बुखार जब
कई दिनों तक ठीक नहीं हुआ तो जांच कराई गई जिसमें पता चला कि उसके दिमाग
में सूजन है।
इसी तरह बंथरा की अंशिका (4), बस्ती के सत्यम (2), हरदोई गांव
के अमित (7), खीरी के साहिल (6), प्रयागपुर बहराइच के जतीन (8), बाराबंकी
के सुमित (8), बंगला बाजार के अरबाज (7), मौलवीगंज के अनिक (9) और कैसरबाग
की रश्मि ( 7) को दिमागी बुखार की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया
गया है।
अरबाज का कई दिनों से इलाज चल रहा
था। कई दिनों के इलाज के बाद भी सुधार न होने पर उसे जैसे ही खून चढ़ाया,
उसके बाएं गाल पर सूजन आ गई। कुछ दिन के इलाज के बाद सूजन ठीक हुई तो दाईं
तरफ सूजन आ गई जिससे परिवार वाले परेशान हैं।
इसी तरह बलरामपुर अस्पताल के
बाल रोग विभाग में दिमागी बुखार के आठ मरीज भर्ती हैं, इसमें बलरामपुर के
सुशील (6) की हालत बेहद नाजुक है। उसके पिता ने बताया कि दो दिन बुखार आया
उसके बाद से उसे होश नहीं है।
यहां तमाम प्रयासों के बाद भी उसे अब तक होश
नहीं आया है। इसके अलावा फैजाबाद के शुभम अवस्थी (6), हरदोई की सविता (7),
मल्हौर के मोहम्मद तौहीब (4), लखीमपुर की सकीना (6), लविवि कैंपस की वर्षा
(7), और सुल्तानपुर के तारिक (9) और संजय (10) को दिमागी बुखार की शिकायत
के बाद भर्ती किया गया है।
सकीना के घर वालों के मुताबिक बुखार के बाद उसको
झटके भी आने लगे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक सभी बच्चों का नियमित इलाज किया
जा रहा है और पहले की अपेक्षा उनकी सेहत में काफी सुधार देखा जा रहा है।