एटीएस की गिरफ्त में आए अलकायदा के संदिग्ध आतंकी मिनहाज से जो जानकारी जांच एजेंसी को मिली है उसने सुरक्षा एजेंसियों को चौकन्ना कर दिया है। मिनहाज आठ साल पहले सऊदी से लौटा है। यहां उसके संपर्क अफगानियों और पाकिस्तानियों के साथ-साथ ईरानियों से भी रहे थे। सऊदी और ईरान दोनों ही भारत के मित्र देश हैं। ऐसे में भारत के खिलाफ साजिश कौन रच रहा है, ये पता लगाने के लिए केंद्रीय एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं।
एटीएस के आईजी जीके गोस्वामी ने बताया कि जो सूचनाएं मिल रही हैं उन्हें पहले सत्यापित किया जाएगा, उसके बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। उन्होंने बताया कि अभी सऊदी में रहने के दौरान मिनहाज किन-किन लोगोंसे संपर्क में रहा इस बारे में फिलहाल पूछताछ नहीं की गई है। रिमांड पर आने के बाद सभी सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे। इस पूरे मामले में केंद्रीय एजेंसियां भी नजर बनाए हुए हैं। मसीरु द्दीन और मिनहाज के रिमांड पर आने के बाद केंद्रीय जांच एजेंसियां और सुरक्षा एजेंसियां भी लखनऊ आकर उनसे पूछताछ करेंगी।
आईएसआईएस और अलकायदा का प्रबल विरोधी है ईरान
ईरान आईएसआईएस और अलकायदा का प्रबल विरोधी रहा है। आईएसआईएस को मध्य पूर्व में चोट पहुंचाने में ईरान का बड़ा हाथ रहा है। आईएसआईएस और अलकायदा को लेकर भारत और ईरान का नजरिया एक जैसा है। शिया बाहुल्य ईरान इकलौता देश है जहां शिया समुदाय की हुकूमत हैं। यहां सुन्नियों की संख्या अन्य इस्लामिक देशों के मुकाबले काफी कम है। ऐसे में सऊदी में बैठकर इरानियों, अफगानिस्तानियों और पाकिस्तानियों की सांठ-गांठ भारत के खिलाफ एक बड़ी साजिश भी हो सकती है।
टेलीग्राम एप का डाटा रिकवर कराएगी एटीएस
यूपी एटीएस मिनहाज के मोबाइल का डाटा रिकवर कराएगी। इसमें टेलीग्राम एप पर संदिग्ध लोगों से बातचीत का ब्यौरा होने की बात भी कही जा रही है। इस चैट को डिलीट कर दिया गया है। सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान में बैठा उमर हलमंडी भी इसी ग्रुप से जुड़ा हुआ था। ईरान, अफगानिस्तान व पाकिस्तान में बने दूसरे मित्र भी इसी टेलीग्राम ग्रुप में शामिल थे, ऐसा संदेह जताया जा रहा है। सच्चाई चैट रिकवर होने के बाद ही सामने आएगी।
बैंक से मांगी गई डिटेल
एटीएस के आईजी ने बताया कि इन दोनों के खातों को लेकर बैंकों से डिटेल मांगी गई है। डिटेल मिलने के बाद ही पता चल सकेगा कि इन लोगों के किन-किन बैंकों में खाते हैं और खातों में पैसे कहां-कहां से आते थे?