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फैजाबाद कोर्ट कांड में हुए सनसनीखेज खुलासे

Fri, 11 Jul 2014 01:00 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फैजाबाद
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जिला व सत्र न्यायालय परिसर में बुधवार को हुए गैंगवार में चले बम के बरामद टुकड़े, छर्रे आदि समेत तीन बमों को जांच के लिए फारेंसिंक लैब आगरा भेजा जा रहा है।
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विशेषज्ञ मानते हैं कि बम बेहद खतरनाक किस्म के थे, शरीर पर लगने पर मौत निश्चित थी। यह खुद का बनाया हुआ बम था।

इसमें टाइमर का इस्तेमाल नहीं है लेकिन सुतली बम से कई गुना ज्यादा क्षमता का था। एसएसपी केबी सिंह का कहना है कि इसे कहीं भी ले जाने में फटने का डर काफी कम रहता, जबकि सुतली बम बहुत संभालकर ले जाने पड़ते है, वे अक्सर फट जाते हैं।

...तो मौत निश्चित थी

सुलतानपुर जिले के धनपतगंज क्षेत्र के ब्लॉक प्रमुख यशभद्र सिंह उर्फ मोनू सिंह (35) पर बुधवार को जिस बम से हमला हुआ था, वह शरीर पर लगता तो बचना नामुमकिन था।

बम को लेकर पुलिस के एक्सपर्ट यही राय रखते हैं। हालांकि घटना के वक्त मोनू ने जैसे ही साधु वेशधारी हमलावर को बम निकालते देखा, संभल गए थे।

जबकि बम जहां गिरा पहले मोनू वहीं खड़े थे। बम के पार्टिकल्स से आई चोट अब खतरे से बाहर बताई जा रही है।
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फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए बम

हमले में यशभद्र सिंह उर्फ मोनू पुत्र स्व. इंद्रभद्र सिंह निवासी मायंग थाना कुरेभार जिला सुलतानपुर, उनके प्राइवेट अंगरक्षक इसी थाना क्षेत्र के गांव नौगंवा निवासी राज कुमार सिंह (31) पुत्र रामकलप सिंह, प्रीती सरैया गांव निवासी मनोज कुमार सिंह (32) पुत्र जगत नरायन सिंह, अधिवक्ता श्रीदेव मिश्र (35) पुत्र राजमणि निवासी मंझवा मायंग घायल हो गए थे। जबकि इनके साथी अरविंद सिंह व श्रवण कुमार गुप्ता को मामूली चोट आई थी।

एसएसपी केबी सिंह ने बताया कि बम के पार्टिकल्स जांच के लिए फारेंसिंक लैब आगरा भेजे जा रहे हैं। तीनों बम की भी जांच होगी। प्रारंभिक जांच में यही सामने आया है कि बम बेहद खतरनाक किस्म के थे।

इस बम से यदि शरीर पर हमला किया जाता तो व्यक्ति का बचना संभव नहीं होता। शरीर का हिस्सा उड़ जाता है। लेकिन यहां बम जमीन पर फटा, जिससे घायलों में अब कोई खतरे में नहीं है।
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