केजीएमयू और संजय गांधी पीजीआई के बीच कैडवर से अंग प्रत्यारोपण पर लगा अल्पविराम हट गया है। सोमवार को बाराबंकी निवासी बृजेश शुक्ला के ब्रेन डेथ घोषित होने के बाद दोनों संस्थानों के बीच लगभग ठप पड़ चुकी प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को दोबारा जीवन मिला।
बृजेश की किडनी एसजीपीजीआई में मयंक और अजीजुल हसन नाम के युवकों को लगा दी गई। जबकि लिवर को ट्रांसप्लांट के लायक नहीं पाया गया। बाराबंकी निवासी 24 वर्षीय बृजेश शुक्ल सड़क दुर्घटना में बुरी तरह से घायल हो गया था।
उसे चार दिसंबर को केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था। सिर में चोट के कारण उसकी स्थिति काफी गंभीर थी। सोमवार को जांच के बाद चिकित्सकों ने उसे ब्रेन डेथ घोषित कर दिया।
इसके बाद काउंसलर ने बृजेश की मां रेखा शुक्ला और अन्य परिवारीजनों से उसके अंगदान के बारे में बातचीत की। परिवारीजनों ने थोड़ी कोशिशों के बाद इसकी अनुमति दे दी। इसी के साथ ही कैडवर से मिले अंग किसे लगाए जाएं, इसके लिए मरीजों की तलाश शुरू हुई।