सरकार ने अभ्यर्थियों की सुविधा का भी ध्यान रखा है। अब एक छोर के अभ्यर्थी को दूसरे छोर के जिले में परीक्षा के लिए दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। सरकार ने तय किया है कि परीक्षार्थियों को उनके निवास के मंडल से अलग करीब के परीक्षा केंद्र भेजा जाए। हालांकि परीक्षा केंद्रों का आवंटन रेंडम आधार पर होगा जिससे एक ही स्थान के परीक्षार्थी एक ही केंद्र में परीक्षा न दे सकें।
समिति ने परीक्षा केंद्रों के निर्धारण व ग्रेडिंग के लिए 28 मानक तय किए हैं। इसके लिए डीएम की अध्यक्षता में एक समिति होगी। इसमें एसएसपी, एनआईसी अधिकारी, उच्च शिक्षा व तकनीकी शिक्षा नियामक अधिकारी तथा डीआईओएस शामिल होंगे। ये अधिकारी प्रस्तावित परीक्षा केंद्र पर सीसीटीवी कैमरे, लाइट, फर्नीचर, पानी, बिजली जैसी व्यवस्थाओं व पूर्व में केंद्र बनने के ट्रैक रिकॉर्ड की जांच करेंगे। फिर शासकीय, अनुदानित अशासकीय व निजी संस्था के रूप में केंद्र का निर्धारण होगा। ‘ए’, ‘बी’, ‘सी’ व ‘डी’ श्रेणी के केंद्र तय किए जाएंगे। समिति संदिग्ध छवि वाले केंद्रों को भी चिह्नित करेगी और इन्हें किसी भी दशा में परीक्षा केंद्र नहीं बनाया जाएगा।
दो स्तर पर परीक्षा का प्रबंधन
परीक्षा से जुड़ी प्रक्रिया दो स्तर पर होगी। गोपनीय कार्यों में प्रश्नपत्र सेटिंग, छपाई, आवागमन, मूल्यांकन व रिजल्ट तैयार करने वाली संस्था का चयन आयोग व बोर्ड अपने स्तर पर करेंगे। आवेदन पत्र प्राप्त करना व परीक्षा का संचालन किसी अन्य एजेंसी को दिया जाएगा और पेपर प्रदेश के बाहर के प्रिंटिंग प्रेस से छपाए जाएंगे।