रायबरेली। ग्रामीण क्षेत्र की करीब 32 लाख से आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। जरूरत पर ब्लड मुहैया कराने के लिए पांचों फर्स्ट रेफरल यूनिटों (एफआरयू) में ब्लड स्टोरेज यूनिट स्थापित कराने का काम शुरू हो गया है। बछरावां सीएचसी में जिले की ग्रामीण क्षेत्र की पहली ब्लड स्टोरेज यूनिट ने बुधवार से काम करना शुरू कर दिया है। चार सीएचसी में भी जल्द ही यूनिटें काम करना शुरू करेंगी। ऐसा होने के बाद अब सीएचसी में ब्लड तुरंत मिल जाने से मरीजों का इलाज हो सकेगा। उन्हें जिला अस्पताल रेफर नहीं करना पड़ेगा।
जिले की सीएचसी बछरावां, लालगंज, डलमऊ, ऊंचाहार और सलोन को एफआरयू का दर्जा दिया गया है। सिजेरियन प्रसव की सुविधा एफआरयू में उपलब्ध है। प्रसूताओं व अन्य तमाम मरीजों को इलाज के दौरान ब्लड की जरूरत पड़ती है, लेकिन सीएचसी स्तर पर ब्लड न मिल पाने के कारण इलाज में समस्या होती है। ब्लड के अभाव में मरीजों को जिला अस्पताल रेफर करना पड़ता है। इस समस्या के निदान के लिए सभी पांचों एफआरयू में ब्लड स्टोरेज यूनिट स्थापित कराने की प्रक्रिया चल रही है।
जांच संबंधी सारी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद बुधवार को बछरावां सीएचसी में यूनिट ने काम करना शुरू कर दिया है। जिला अस्पताल से 10 यूनिट ब्लड भिजवाया गया है। अब जरूरत पड़ने पर मरीजों को तुरंत ब्लड सीएचसी में ही मिल जाएगा। लखनऊ से सटे और हाईवे पर होने के कारण बछरावां सीएचसी में ज्यादा मरीज पहुंचते हैं।
इसके अलावा लालगंज, ऊंचाहार, डलमऊ और सलोन में भी ब्लड स्टोरेज यूनिट स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही इन अस्पतालों में भी मरीजों को यह सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी। जिला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी डीएस अस्थाना ने बताया कि लोगों को ब्लड के लिए खून डोनेट करना होगा। इसके एवज में मरीजों को जरूरत के हिसाब से संबंधित ग्रुप का ब्लड मुहैया कराया जाएगा।