लखनऊ। ब्लैडर कैंसर के बुजुर्ग, कमजोर या किडनी की कम कार्यक्षमता वाले मरीजों के लिए सर्जरी का एक सरल विकल्प सामने आया है। इसमें आंत का हिस्सा इस्तेमाल किए बिना पेशाब बाहर निकालने का रास्ता बनाया जाता है। लोहिया संस्थान के यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. ईश्वर राम धायल इस तकनीक से जुड़े 15 वर्षों के अनुभव और 400 से अधिक मरीजों के नतीजे टोरंटो में विशेषज्ञों के सामने प्रस्तुत करेंगे। उनका चयन इंटरनेशनल ब्लैडर कैंसर नेटवर्क की वार्षिक बैठक-2026 के लिए हुआ है।
डॉ. धायल मांसपेशियों तक फैल चुके गंभीर ब्लैडर कैंसर में रेडिकल सिस्टेक्टॉमी और क्यूटेनियस यूरेटेरोस्टॉमी के नतीजे साझा करेंगे। अध्ययन में ऑपरेशन का समय, खून की कमी, अस्पताल में भर्ती अवधि, संक्रमण, किडनी की कार्यक्षमता और सर्जरी बाद की जटिलताओं का आकलन किया गया। उनके अनुसार हर मरीज के लिए एक जैसी सर्जरी उपयुक्त नहीं होती। उम्र, स्वास्थ्य और किडनी की स्थिति देखकर सर्जरी तय करना जरूरी है। इस बैठक दुनियाभर के 150 से 200 विशेषज्ञों के शामिल होने की उम्मीद है।