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Lucknow News: महफिल-ए-टिकैत राय में सजा लखनवी तहजीब, साहित्य और स्वाद का रंग

Mon, 07 Sep 2026 02:26 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
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कार्यक्रम में माैजूद गणमान्य
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लखनऊ। लखनऊ की तहजीब, साहित्य, इतिहास और जायके की बात हो तो किस्से अपने आप निकल आते हैं। गोमती नगर स्थित विस्तार क्लब में रविवार को ''''वाह लखनऊ'''' की ओर से आयोजित ''''महफिल-ए-टिकैत राय'''' में शहर के ऐसे ही रंग एक साथ दिखाई दिए। मुख्य अतिथि अंडमान के नवनियुक्त उप राज्यपाल डॉ. दिनेश शर्मा लखनऊ से अपने लंबे जुड़ाव और राजनीतिक जीवन की यादें साझा करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि उप राज्यपाल पद की शपथ लेने से पहले उन्हें भाजपा से इस्तीफा देना होगा। इसके बाद महफिल में साहित्य, इतिहास और लखनऊ के खानपान पर बातचीत का सिलसिला चला।
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कार्यक्रम में लेखक अभिषेक दत्ता की पुस्तक ''''हनुमान रामायण से पहले'''' का लोकार्पण हुआ। इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार व लेखक नवल कांत सिन्हा कनक रेखा चौहान, राय रवि बली, राजीव श्रीवास्तव, साक्षी, मनीष मिश्रा और आदेश शुक्ला मौजूद रहे। लेखक से उमाशंकर दुबे ने संवाद किया। पुस्तक में रामकथा और हनुमान से जुड़े उन पहलुओं को सामने लाने की कोशिश की गई है, जो प्रचलित आख्यानों से अलग हैं।

इसके बाद लेखक आशुतोष शुक्ल की कहानी ''''फोनबुक'''' का पाठ आरजे प्रतीक ने किया। कहानी पाठ ने महफिल में साहित्य और प्रस्तुति का नया रंग जोड़ा।

शरर के बहाने छिड़ी पुराने लखनऊ की चर्चा

कार्यक्रम का प्रमुख सत्र ''''अब्दुल हलीम शरर और लखनऊ'''' रहा। चार सितंबर को शरर की जयंती के अवसर पर हिमांशु बाजपेयी ने उनकी रचनाओं और उनके समय के लखनऊ पर बातचीत की। उन्होंने बताया कि शरर के लेखन में लखनऊ केवल एक शहर नहीं, बल्कि यहां की सामाजिक और सांस्कृतिक जिंदगी के रूप में दिखाई देता है। चर्चा में यह भी बात सामने आई कि शहर को समझने के लिए उसके इतिहास के साथ उसके किस्सों, किरदारों और रोजमर्रा की जिंदगी को जानना जरूरी है। साहित्यकार कुंवर नारायण को भी याद किया गया, जिनका जन्मदिन 22 सितंबर को है।
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भटूरे से निकले स्वाद के पुराने किस्से

महफिल का सबसे लखनवी सत्र रहा ''''लखनऊ के भटूरे पर चकल्लस''''। सुधीर मिश्रा और अन्य प्रतिभागियों ने भटूरे के बहाने पुराने बाजारों, दुकानों, स्वाद और उनसे जुड़ी यादों को साझा किया। बात स्वाद से शुरू हुई और लखनऊ की खानपान की संस्कृति तक पहुंच गई।

उमाशंकर दुबे ने कहा कि महफिल का उद्देश्य लखनऊ को सिर्फ शहर नहीं, बल्कि उसकी तहजीब, भाषा, साहित्य, इतिहास, खान-पान और सामूहिक स्मृतियों के जरिए समझना है।

कार्यक्रम में माैजूद गणमान्य

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