अफसरों की साठगांठ से फर्म से जुड़ी फाइल गायब
ज्ञान सक्सेना
खाद्य व रसद विभाग के अफसरों की नाक के नीचे नियम दरकिनार कर फर्म से राशन की उठान कराई जा रही है। मामले का खुलासा हो जाने के साल भर बाद भी फर्म पर कार्रवाई तो दूर आरएफसी व एसएफसी के जिम्मेदार उसे बचाने में जुटे हैं। इतना ही नहीं दागी घोषित हुई फर्म के संचालक को बचाने के लिए कार्रवाई से जुड़ी पूरी फाइल ही एसएफसी कार्यालय में सालभर से ढूंढने के बाद भी नहीं मिल रही है।
दस्तावेज में गड़बड़ी पर निरस्त हुआ था ठेका
वर्ष 2013-14 में बालाजी एसोसिएट्स के नाम से ब्रह्म नगर कैंपवेल रोड निवासी संचालिका सपना मिश्रा ने स्टेट फूड कॉर्पोरेशन (एसएफसी) से शहर में अनाज उठान का ठेका लिया था। डीएम स्तर से हुई जांच में ठेका लेने के लिए दिए गए दस्तावेज फर्जी पाए गए। इस पर ठेका निरस्त कर काली सूची में डालकर फर्म संचालिका पर एफआईआर करवाने का निर्देश दिया गया था। फर्म से जुड़े लोगों ने विभागीय स्तर पर जोड़-तोड़ कर पूरे मामले को दबा कर सपना मिश्रा के नाम से ही पायनियर एसोसिएट्स को गठित कर वर्ष 2019-20 में रीजनल फूड कार्पोरेशन (आरएफसी) से शहर से जुड़े ऐशबाग गोदाम प्रभारी की मिलीभगत से फिर से अनाज उठान का ठेका हथिया लिया।
जानिए, क्या है नियम
शासनादेश के अनुसार, खाद्य व रसद विभाग से जुड़े किसी भी तरह के उठान कार्य से जुड़ी कोई भी फर्म दागी होने के बाद उसके संचालक या रिश्तेदार से जुड़ी किसी भी दूसरी फर्म को अनाज उठान का कोई ठेका नहीं दिया जा सकता है।
ढूंढने पर भी नहीं मिल रही फाइल
आरटीआई के तहत एसएफसी से मांगी सूचना में सपना मिश्रा की बालाजी एसोसिएट्स फर्म का ठेका 2013-14 में निरस्त होने की बात तो स्वीकारी गई, लेकिन इससे जुड़ी पूरी फाइल ढूंढने पर भी कार्यालय में न मिलने की जानकारी दी गई।
मांगे विवरण का नहीं मिला जवाब
एसएफसी कार्यालय को कई बार पत्र भेजकर पायनियर एसोसिएट्स की संचालिका से जुड़ी बालाजी फर्म के खिलाफ पूर्व में हुई कार्रवाई का विवरण मांगा जा चुका है। जवाब न मिलने के कारण आरएफसी स्तर से फर्म के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
- निश्चल आनंद, जिला खाद्य विपणन अधिकारी