भाजपा ने पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी का जन्मदिन इस बार प्रत्येक बूथ पर मनाया था। मकसद, इस बहाने बूथों की हकीकत भी जानना था। पार्टी के सूत्र बताते हैं कि प्रदेश में 1.40 लाख बूथों में से लगभग एक लाख बूथों पर यह कार्यक्रम हो पाए। खासतौर से दूरस्थ ग्रामीण इलाकों के बूथों पर यह कार्यक्रम बहुत प्रभावी नहीं रहा।
पार्टी के सामने यह तथ्य भी आया कि तमाम दावों के बावजूद कई जगह बूथ कमेटियां बहुत सक्रिय नहीं हैं। बताया जाता है कि बैठक में बूथ कमेटियों की दुरुस्ती के साथ इनकी मजबूती का एजेंडा भी तय किया गया। उन्हें इन कमेटियों के पुनर्गठन के भी निर्देश दिए गए।
इन बैठकों में निकाय चुनाव में जिलों में पार्टी के प्रदर्शन के मद्देनजर विस्तारकों से बातचीत की गई और जरूरी निर्देश दिए गए। विस्तारकों की बैठकों के बाद प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक में इनसे मिले फीडबैक के आधार पर आगे की तैयारी की जाएगी।
भाजपा के रणनीतिकारों ने विधानसभा चुनाव के बाद विस्तारक योजना शुरू की थी। मकसद यह था कि हर जगह भाजपा के पास ऐसे कुछ पूर्णकालिक कार्यकर्ता हो जाएं जो तय किए गए स्थान पर रुककर प्रदेश नेतृत्व के लिहाज से स्थानीय स्तर पर संगठन का काम करें। साथ ही वहां की जमीनी हकीकत से नेतृत्व को अवगत कराते रहें।
प्रदेश नेतृत्व और स्थानीय संगठन के बीच सेतु का काम करें तथा सरकार व संगठन के कामों को नीचे तक पहुंचाएं। इसीलिए विस्तारकों को उनके गृहजिले के बजाय दूसरे जिलों में तैनात किया गया है। पहले चरण में लगभग सवा सौ विस्तारकों को प्रदेश भर में लगाया गया था। पर, सितंबर में लखनऊ में हुई बैठक के बाद सौ और विस्तारकों का चयन करके उन्हें जिलों में भेजा गया है।
इनकी तैनाती लोकसभा क्षेत्रों में की गई है। इन्हें सिर्फ लोकसभा चुनाव के मद्देनजर काम करना है। पार्टी का लक्ष्य विधानसभा के अगले चुनाव तक इनकी संख्या 400 तक पहुंचाने का है।
लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा की चिंता इसी से समझी जा सकती है कि पार्टी ने बूथ स्तर पर लगातार सक्रियता बनाए रखने की रणनीति बनाई है। सहकारिता चुनाव के तुरंत बाद फरवरी में बूथ स्तर पर खेल उत्सव मनाया जाएगा। इसके बाद 6 अप्रैल को पार्टी का स्थापना दिवस भी बूथ स्तर पर मनाया जाएगा। सभी बूथों पर गोष्ठियां होंगी।
पार्टी ने संविधान निर्माता डॉ. आंबेडकर की जयंती 14 अप्रैल को बूथ स्तर पर सामाजिक समरसता दिवस के रूप में मनाने की सोची है। इस दिन भाजपा कार्यकर्ता दलित बस्तियों में सफाई और सेवा के कार्य करेंगे और उन्हें मोदी तथा योगी सरकार के दलितों तथा पिछड़ों के लिए किए गए काम बताएंगे।
इसके बाद 23 जून को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि बलिदान दिवस के रूप में मनाने तथा पार्टी के संस्थापकों में शामिल पं. दीनदयाल उपाध्याय की जयंती 25 सितंबर को सभी बूथों पर सेवा दिवस के रूप में मनाने की योजना है।