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सपा-बसपा के गठजोड़ की काट में भाजपा, दलितों व पिछड़ों को रिझाने के लिए बनाया ये प्लान

Mon, 26 Mar 2018 02:43 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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भाजपा ने सपा और बसपा के गठजोड़ की संभावना से उपजने वाली चुनौतियों की काट की तैयारी शुरू कर दी है। वैसे तो भाजपा ने पहले से ही डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती 14 अप्रैल को प्रदेश के सभी मतदान केंद्रों पर सामाजिक समरसता कार्यक्रम तय कर रखे थे।
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अब पार्टी ने 14 अप्रैल से 5 मई तक ग्राम स्वराज अभियान चलाने का फैसला किया है। इस दौरान पार्टी जगह-जगह दलितों, पिछड़ों, गांवों और गरीबों को सरकार के कामों को बताएगी। साथ ही इनके कल्याण पर फोकस कार्यक्रम किए जाएंगे।

साफ है कि भाजपा ने ग्राम स्वराज अभियान के बहाने दलितों, पिछड़ों और गरीबों के बीच अपनी पहुंच की पकड़ को फिर से मजबूत बनाने की तैयारी की है। ऐसा लगता है कि इस अभियान की डोर किसी न किसी रूप में उत्तर प्रदेश की बदली राजनीतिक परिस्थितियों और सपा, बसपा व कांग्रेस के बीच तेजी से प्रगाढ़ हो रहे रिश्तों से भी जुड़ी है।
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भाजपा के रणनीतिकारों को कहीं न कहीं यह आशंका सताने लगी है कि यह गठबंधन परवान चढ़ा तो उनके लिए राजनीतिक चुनौती बढ़ेगी। इसी संभावना से बनने वाले समीकरणों से पार पाने के लिए भाजपा ने तैयारी शुरू कर दी है।
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यह भी है कारण

- फोटो : amar ujala
2014 से अब तक चल रहा जीत का सिलसिला पीछे छोड़ पार्टी के रणनीतिकारों का सोशल इंजीनियरिंग पर फोकस रहा है। लोकसभा चुनाव हों या विधानसभा, दोनों में दलितों और पिछड़ों पर फोकस से पार्टी को राजनीतिक रूप से लाभ मिला। पर, पिछले दिनों बसपा के समर्थन की घोषणा भर से लोकसभा की गोरखपुर व फूलपुर सीट के उप चुनाव में भाजपा को पराजय का सामना करना पड़ा। फिर राज्यसभा चुनाव में सपा, बसपा और  कांग्रेस ने भाजपा का मुकाबला किया, उसको देखते हुए ही डॉ. अंबेडकर के सहारे भगवा टोली ने सामाजिक समीकरणों को एक बार फिर दुरुस्त करने की तैयारी की है।
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