वैसे तो उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा सहित भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव और पार्टी के उपाध्यक्ष लक्ष्मण आचार्य का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है। पर, भाजपा 10 सदस्यों को सदन में भेजने की स्थिति में है। इस प्रकार भाजपा को सात सदस्यों का लाभ होना तय है। सदन में इस समय भाजपा के सदस्यों की संख्या 25 है।
भाजपा उच्च सदन में किसे भेजेगी इस बहस में उलझे बिना यदि सिर्फ गणित की बात की जाए तो परिषद में सत्तारूढ़ दल के सदस्यों की संख्या 32 हो जाएगी। उधर, सपा को चार सदस्यों के नुकसान के बावजूद सदन में उसका आंकड़ा 51 रहेगा। किन्हीं कारण, सपा यदि दो सदस्य नहीं भेज पाती है तो भी एक तो जाएगा ही। तब भी भाजपा पर सपा भारी रहेगी। ऐसे में भाजपा को सदन में प्रबंधन करके ही चलना पड़ेगा।
वहीं बसपा की बात करें तो जिन 12 सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है उसमें इस पार्टी के दो सदस्य हैं। इसी पार्टी के नेता रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी की सदस्यता पहले ही समाप्त हो चुकी है।
विधायकों का आंकड़ा देखते हुए फिलहाल बसपा से किसी के उच्च सदन जाने की स्थिति नहीं दिख रही है। बशर्ते राज्यसभा के चुनाव की तरह कोई नाटकीय घटनाक्रम न घटे। चूंकि यह वर्ष विधानसभा चुनाव से ठीक पहले का है।
ऐसे में प्रदेश का मुख्य विपक्षी दल होने के नाते सपा अपने संख्या बल का उपयोग करके सदन के जरिये लोगों को यह संदेश देने की कोशिश जरूर करेगी कि भाजपा का बेहतर विकल्प वही है।