भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश प्रभारी ओम माथुर का कहना है कि यूपी में पार्टी चेहरे के बिना ही 2017 का विधानसभा चुनाव लड़ेगी। बशर्ते संसदीय बोर्ड या पार्टी नेतृत्व इससे इतर कोई फैसला न ले ले। कार्यकर्ता मोदी का नाम व काम ही लेकर जनता के बीच जाएंगे।
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उन्होंने कहा कि प्रदेश भाजपा में अब तक क्या होता रहा है, वह सभी बातों से पूरी तरह वाकिफ हैं। इसलिए उनसे निपटने की कार्ययोजना भी सोच रखी है। कहा कि जानता हूं कि उत्तर प्रदेश में संगठन को जमीन तक पहुंचाना बड़ी चुनौती है। इसी चुनौती को सामने रखकर आया हूं। कोई कार्यकर्ता व कोई नेता उपेक्षित नहीं रहेगा। पार्टी हित के लिए किसी के पास जाने में कोई दिक्कत नहीं है।
माथुर शुक्रवार को यहां पत्रकारों से मुखातिब थे। उन्होंने कहा, चुनाव लड़ने के लिए चेहरा जरूरी नहीं है। जनता भी अब चेहरा देखकर वोट नहीं देती। हरियाणा व मुंबई उदाहरण है, जहां पार्टी किसी चेहरे को सामने रखकर चुनाव नहीं लड़ी।
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इसलिए यूपी में भी चुनाव लड़ने के लिए किसी चेहरे को आगे लाना जरूरी नहीं है। मैं यूपी आता रहा हूं। मुझे पता है कि काम कहां से और कैसे शुरू करना है। यह भी जानता हूं कि जहां-जहां मैं अब तक प्रभारी रहा हूं, उनकी तुलना में यूपी की स्थिति दूसरी है।
चुनौतियों से निपटने की खास कार्ययोजना
इस सवाल पर कि नरेंद्र मोदी का जादू 2017 तक कैसे कायम रहेगा? उन्होंने जवाब दिया कि यह चुनौती भी उन्हें पता है। चुनाव के दौरान यूपी में बड़ी संख्या में ऐसे लोगों ने मोदी व भाजपा पर भरोसा किया, जिनका इस चुनाव से पहले पार्टी से कोई वास्ता नहीं था।
ऐसे लोगों को पार्टी के साथ कैसे जोड़कर रखा जाए, जनता के बीच नरेंद्र मोदी की विश्वसनीयता व समर्थन को कैसे और मजबूत किया जाए, यह सब चिंताएं यूपी की चुनौतियों से निपटने की कार्ययोजना में शामिल हैं। आने वाले दिनों में इसी पर काम होता दिखेगा।
माथुर ने कहा कि जिलों से लेकर प्रदेश तक सभी की जिम्मेदारी तय होगी। साथ ही इस बात की भी समीक्षा होगी कि संगठन की योजना के अनुसार सौंपी गई जिम्मेदारी में वे कहां तक सफल रहे हैं। इस बारे में सभी से कह भी दिया है। प्रदेश महामंत्री (संगठन) से भी कहा है कि वह अपने प्रवास तय करें।
विशिष्ट जातियों का विशिष्ट पार्टियों से जुड़ाव नहीं
प्रदेश में सपा व बसपा जैसी पार्टियों का मजबूत जातीय आधार है, इनसे कैसे निपटेंगे? इस पर माथुर ने कहा कि भाजपा जाति को ध्यान में रखकर कोई फैसला नहीं करती। लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिले मतों से यह साबित हो गया है कि यूपी में कुछ विशिष्ट जातियों का विशिष्ट पार्टियों के साथ स्थायी जुड़ाव की बातों में बहुत दम नहीं है।
विश्वसनीयता बनाकर समाज के सभी वर्गों को पार्टी के साथ जोड़ा जा सकता है। हमारे बारे में यह धारणा बना दी गई थी कि हम सिर्फ बनियों की व शहरों की पार्टी हैं। पर, समय के साथ यह साबित हो चुका है कि भाजपा, सबकी पार्टी है।
काम करने वालों को आगे लाएंगे माथुर ने कहा कि मुझे पता है कि कुछ कारणों से यूपी के कई कार्यकर्ता कभी-कभी हताश होकर घर बैठ जाते हैं। मैं इस स्थिति से उन्हें निकालूंगा।
उनसे लगातार संपर्क व संवाद रहेगा। वह जो भी बात रखेंगे, उसे गंभीरता से सुनूंगा। वैसे यूपी का कार्यकर्ता 2017 में यहां भाजपा की सरकार बनवाने को मानसिक रूप से तैयार हैं। बैठक में 95 जिलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति इसका प्रमाण है।
माथुर ने कहा कि पार्टी ने डिजिटल सदस्यता इसीलिए शुरू की है कि जिससे कुछ लोगों का संगठन पर कब्जा न चले। अभी तक लोग अपने-अपने लोगों को ही मौका देते थे। कभी-कभी कुछ लोगों को सदस्यता देने में अड़ंगा लगा दिया जाता था। मनोनयन संगठन की परंपरा नहीं है। इसलिए इस पर सख्ती से रोक लगेगी।
सदस्यता चल रही है। फिर चुनाव होंगे। प्रयास से सहमति से अध्यक्षों के चयन का होगा। नहीं तो चुनाव होगा। कोई थोपा नहीं जाएगा। उम्मीद है कि अप्रैल-मई तक संगठन का नया ढांचा खड़ा हो जाएगा।
दुश्मन को मजबूत मानकर काम उत्तर प्रदेश में भाजपा के खिलाफ बाकी के दल एकजुट हो गए तो, उन्होंने कहा कि सभी संभावनाओं को सामने रखकर काम शुरू किया है। वैसे भी किसी छोटी समस्या को बड़ी चुनौती ही मानकर काम करता हूं।
लोग भले ही सामने वाले दुश्मन की चिंता करते हों, लेकिन हमारा मानना है कि दुश्मन दसों दिशाओं से एक-साथ हमला कर सकता है। फिर यहां तो कई हैं। पार्टी कार्यकर्ता इन सारे दुश्मनों से एक साथ निपट सकें, उनके भीतर इस क्षमता को विकसित करूंगा।