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कसौटियों पर खरा उतरने की तैयारी में जुटी भाजपा, यूपी के बजट में हो सकती हैं बड़ी घोषणाएं

Mon, 15 Jan 2018 01:23 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : amar ujala
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यूपी में भाजपा की सरकार बने भले ही अभी एक वर्ष का समय भी न पूरा हुआ हो, लेकिन पार्टी के रणनीतिकारों पर कसौटियों पर खरा उतरने का दबाव बढ़ गया है। इस सिलसिले में तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। कसौटी भी अपने ही वादों की। इसके लिए भाजपा के प्रमुख पदाधिकारियों और सरकार के प्रमुख प्रतिनिधियों की इसी महीने साझा बैठक करके इस सिलसिले में ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा।

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कोशिश है कि योगी सरकार के अगले वित्तीय वर्ष के बजट में विधानसभा चुनाव के दौरान संकल्प पत्र में किए गए उन वादों को पूरा करने का संदेश दे दिया जाए, जिनके जरिये पार्टी को मिलने वाले वोटों में बढ़ोतरी की जा सकती है।

केंद्र सरकार हो या प्रदेश सरकार, दोनों के सामने इस वर्ष बजट को लेकर बड़ी चुनौती है। कारण, दोनों ही सरकारों का बजट एक तरह से चुनावी सरोकारों वाला होगा। दोनों ही सरकारों की तरफ से बजट में ऐसे प्रावधान करने की कोशिश होगी जिनका वादा लोकसभा या विधानसभा चुनाव में किया गया था। वैसे प्रदेश की योगी सरकार के पास विधानसभा चुनाव के संकल्प पत्र के वादों को पूरा करने के लिए अभी लगभग चार वर्ष का समय है।
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बावजूद इसके प्रदेश सरकार पर बजट में विधानसभा चुनाव के संकल्प पत्र में किए कुछ वादों को पूरा करने का दबाव इसलिए है क्योंकि भाजपा भी जानती है कि लोकसभा चुनाव में विपक्ष, प्रदेश के विधानसभा चुनाव में किए गए वादों को भी मुद्दा जरूर बनाएगा। इसलिए प्रदेश सरकार को भी यह संदेश देना होगा कि वादों पर अमल को लेकर भाजपा काफी गंभीर है।

इन कामों पर हो सकता है प्रावधान

माना जाता है कि बैठक में लोगों के सरोकारों से जुड़े और संदेश देने वाले वादों को ड्राफ्ट में शामिल करके उन्हें पूरा करने पर ज्यादा जोर रहेगा। भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेता अनौपचारिक बातचीत में जो कुछ बताते हैं, उससे पता चलता है कि गरीबों के कल्याण के लिए संकल्प पत्र में किए वादों पर अमल की तैयारी है।

गरीब कल्याण कार्ड का प्रावधान करके उन्हें लाभ देने की व्यवस्था का प्रावधान किया जा सकता है। खास तौर से गरीबों को अस्पतालों में चिकित्सा, आवास और खान-पान की सस्ती वस्तुएं उपलब्ध कराने को लेकर बजट में इंतजाम किए जा सकते हैं।

पूर्वांचल और बुंदेलखंड को साधने पर जोर
चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने पूर्वांचल और बुंदेलखंड के जिलों में भौगोलिक, सामाजिक तथा आर्थिक कठिनाइयों का उल्लेख करते हुए सरकार बनने पर इन इलाकों की तरक्की के लिए काम करने का संकल्प व्यक्त किया था। इसके लिए बुंदेलखंड विकास बोर्ड व पूर्वांचल विकास बोर्ड बनाने के संकल्प को भी वादों में शामिल किया गया था।

लोकसभा का चुनाव हो या विधानसभा का, दोनों में इन इलाकों से भाजपा को जबर्दस्त सफलता मिली। स्वाभाविक है कि भाजपा के रणनीतिकार चाहेंगे कि इन क्षेत्रों में पार्टी की पकड़ और पहुंच ऐसी ही बनी रहे। इसलिए योगी सरकार पूर्वांचल विकास बोर्ड व बुंदेलखंड विकास बोर्ड गठित करने की घोषणा कर सकती है।
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व्यापारियों-किसानों के लिए हो सकती है व्यवस्था

- फोटो : amar ujala
व्यापारियों को भाजपा का परंपरागत वोट माना जाता रहा है। भाजपा ने विधानसभा चुनाव के संकल्प पत्र में व्यापारियों की सुविधा के लिए व्यापार कल्याण बोर्ड बनाने का वादा किया था। साथ ही व्यापारियों के विवादों को निपटाने के लिए प्रत्येक जिले में ‘मध्यस्थता प्राधिकरण’ बनाने का भी वादा किया था।

बैठक में व्यापारियों को पार्टी के पक्ष में लामबंद रखने के लिए सरकार को इस सिलसिले में कदम उठाने का सुझाव दिया जा सकता है। लघु एवं सीमांत किसानों के लगभग एक लाख रुपये तक फसली ऋण को माफ करने का फैसला कर चुकी योगी सरकार पर एक बार फिर लोकसभा चुनाव के मद्देनजर किसानों को लुभाने के लिए भी कुछ न कुछ करने का दबाव है।
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