माना जाता है कि बैठक में लोगों के सरोकारों से जुड़े और संदेश देने वाले वादों को ड्राफ्ट में शामिल करके उन्हें पूरा करने पर ज्यादा जोर रहेगा। भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेता अनौपचारिक बातचीत में जो कुछ बताते हैं, उससे पता चलता है कि गरीबों के कल्याण के लिए संकल्प पत्र में किए वादों पर अमल की तैयारी है।
गरीब कल्याण कार्ड का प्रावधान करके उन्हें लाभ देने की व्यवस्था का प्रावधान किया जा सकता है। खास तौर से गरीबों को अस्पतालों में चिकित्सा, आवास और खान-पान की सस्ती वस्तुएं उपलब्ध कराने को लेकर बजट में इंतजाम किए जा सकते हैं।
पूर्वांचल और बुंदेलखंड को साधने पर जोर
चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने पूर्वांचल और बुंदेलखंड के जिलों में भौगोलिक, सामाजिक तथा आर्थिक कठिनाइयों का उल्लेख करते हुए सरकार बनने पर इन इलाकों की तरक्की के लिए काम करने का संकल्प व्यक्त किया था। इसके लिए बुंदेलखंड विकास बोर्ड व पूर्वांचल विकास बोर्ड बनाने के संकल्प को भी वादों में शामिल किया गया था।
लोकसभा का चुनाव हो या विधानसभा का, दोनों में इन इलाकों से भाजपा को जबर्दस्त सफलता मिली। स्वाभाविक है कि भाजपा के रणनीतिकार चाहेंगे कि इन क्षेत्रों में पार्टी की पकड़ और पहुंच ऐसी ही बनी रहे। इसलिए योगी सरकार पूर्वांचल विकास बोर्ड व बुंदेलखंड विकास बोर्ड गठित करने की घोषणा कर सकती है।
व्यापारियों को भाजपा का परंपरागत वोट माना जाता रहा है। भाजपा ने विधानसभा चुनाव के संकल्प पत्र में व्यापारियों की सुविधा के लिए व्यापार कल्याण बोर्ड बनाने का वादा किया था। साथ ही व्यापारियों के विवादों को निपटाने के लिए प्रत्येक जिले में ‘मध्यस्थता प्राधिकरण’ बनाने का भी वादा किया था।
बैठक में व्यापारियों को पार्टी के पक्ष में लामबंद रखने के लिए सरकार को इस सिलसिले में कदम उठाने का सुझाव दिया जा सकता है। लघु एवं सीमांत किसानों के लगभग एक लाख रुपये तक फसली ऋण को माफ करने का फैसला कर चुकी योगी सरकार पर एक बार फिर लोकसभा चुनाव के मद्देनजर किसानों को लुभाने के लिए भी कुछ न कुछ करने का दबाव है।