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'परिवर्तन यात्राओं' से यूपी में बदलाव का बिगुल फूंकेगी भाजपा

Fri, 19 Aug 2016 11:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह - फोटो : amar ujala
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भाजपा ने चुनावी समर साधने के लिए सूबे में चारों दिशाओं से ‘परिवर्तन यात्राएं’ निकालने का फैसला किया है। ऐसा करके वह पूरे प्रदेश में परिवर्तन का बिगुल फूंकना चाहती है। चुनावी समीकरण के लिहाज से इन यात्राओं के रथ के रथी कौन हों, इस पर अभी थोड़ा असमंजस है। पर, बाकी सारी तैयारी को अंतिम रूप दे दिया गया है।
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तीन महीने चलने वाली इन यात्राओं को सितंबर से शुरू करने की योजना है। इसका समापन लखनऊ में होगा। उस मौके पर यहां परिवर्तन रैली के जरिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सूबे में परिवर्तन का शंखनाद करेंगे।

रणनीतिकारों ने एक रथ मिर्जापुर या सोनभद्र से, दूसरा कुशीनगर या गोरखपुर से, तीसरा सहारनपुर से और चौथा रथ ललितपुर या झांसी से निकालने की योजना बनाई है। सभी रथों को एक साथ रवाना किया जाएगा। इनको हरी झंडी दिखाने के लिए नेताओं के नाम तय किए जा रहे हैं।
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पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती 25 सितंबर को या इसके आसपास इन्हें शुरू करने की तैयारी है। सभी रथों का रूट तय कर दिया गया है। हर रथ लगभग 100 विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरेगा। इस दौरान वह 15 से 20 हजार किलोमीटर की यात्रा करेगा। यात्रा लगभग तीन महीने चलेगी। हर विधानसभा क्षेत्र में एक सभा होगी, जिसे भाजपा का कोई प्रमुख नेता संबोधित करेगा।
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'अलग दिन, अलग रथी' से पूरी होगी रथ यात्रा

पहले फैसला किया गया था कि भाजपा के चार प्रमुख नेता इन रथों को संभालें और भ्रमण करें। इनमें राजनाथ सिंह, कलराज मिश्र, केशव मौर्य और रामशंकर कठेरिया के नाम तय किए गए थे। बीच-बीच में अमित शाह और ओम माथुर सहित अन्य केंद्रीय मंत्रियों व नेताओं के कार्यक्रमों से माहौल बनाने की योजना बनाई गई थी लेकिन बाद में विचार-विमर्श के दौरान रणनीतिकारों को यह अव्यावहारिक लगा।

मसलन, केंद्र में गृह मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय का मंत्री होने के नाते राजनाथ सिंह के लिए लगातार इतना समय निकालना ठीक नहीं था। इसे देखते हुए अब अलग दिन, अलग रथी का फैसला किया गया है। केंद्रीय नेतृत्व से बातचीत के बाद इस बारे में फैसला हो जाएगा।

समीकरण करेंगे दुरुस्त
रणनीतिकारों का सुझाव है कि अलग दिन अलग नेता को रथ पर सवार किया जाए। इससे दो काम हो जाएंगे। एक तो रथों के मार्ग के लिहाज से स्थानीय समीकरणों के आधार पर नेताओं को भेजकर समीकरण ठीक किए जा सकेंगे। साथ ही प्रमुख नेता सभी क्षेत्रों में पहुंच जाएंगे।

यही नहीं, जरूरत के लिहाज से केंद्रीय नेताओं को भी इन रथों पर सवार किया जा सकेगा। इससे उनके प्रभाव और पहुंच का लाभ भी उठाया जा सकेगा।
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