रामपुर और जलालपुर से क्रमश: सपा और बसपा के विधायक सांसद चुने गए हैं। इन दोनों संसदीय सीटों की जिम्मेदारी आसपास के भाजपा सांसदों और विधायकों को देने की योजना बनी है।
यही रणनीति हमीरपुर विधानसभा सीट के लिए भी तय की गई है। हमीरपुर के विधायक अशोक चंदेल को आजीवन कारावास की सजा होने के कारण उनकी सदस्यता रद्द हो गई है।
लोकसभा चुनाव में वोटों का आंकड़ा 50 प्रतिशत के करीब पहुंचने से उत्साहित भाजपा नेतृत्व की कोशिश उपचुनाव में भी बूथवार रणनीति बनाने की है। इसके लिए जिलाध्यक्षों को बैठक में संबंधित सीटों पर 2017 के विधानसभा चुनाव और 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रत्याशियों को मिले वोटों का विवरण लेकर आने को कहा गया है। इसके आधार पर रणनीतिकार संबंधित स्थानों पर वोटों का उतार-चढ़ाव समझेंगे।
ये है वजह
उपचुनाव को लेकर भाजपा का अनुभव बहुत अच्छा नहीं रहा है। इसीलिए पार्टी नेतृत्व की कोशिश कोई कसर न छोड़ने की है। इन्हें एहसास है कि उपचुनाव में अपेक्षित नतीजे न मिलने से सरकार और संगठन पर सीधे भले ही कोई न प्रभाव न पड़े, लेकिन विपक्ष का हौसला बढ़ जाएगा। उसके पास भाजपा को घेरने और साख पर सवाल उठाने का भी आधार हो जाएगा।
गोविंदनगर (कानपुर), टूंडला (फिरोजाबाद), कैंट (लखनऊ), जैदपुर (बाराबंकी), मानिकपुर (चित्रकूट), बलहा (बहराइच), गंगोह (सहारनपुर), इगलास (अलीगढ़), प्रतापगढ़, रामपुर, जलालपुर (अंबेडकरनगर) व हमीरपुर।