भले ही मुख्यमंत्री के नाम पर भाजपा में अभी सस्पेंस हो लेकिन पार्टी के रणनीतिकार नई सरकार की भूमिका तैयार करने में जुट गए हैं। इसमें सरकार से लेकर विधायकों तक के काम शामिल हैं।
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नवनिर्वाचित विधायकों की 18 मार्च को शाम 5 बजे लखनऊ में बैठक होगी। इसमें उस व्यक्ति को औपचारिक तौर पर भाजपा विधानमंडल दल का नेता चुना जाएगा जिसे केंद्रीय नेतृत्व मुख्यमंत्री बनाने के लिए हरी झंडी देगा।
सूत्रों का कहना है कि कोशिश यह है कि नई सरकार आगे के पूरे रोडमैप के साथ शपथ ले। इसीलिए कुछ वक्त लग रहा है, क्योंकि पार्टी चाहती है कि रोडमैप के कामों पर तुरंत घोषणा करके अमल शुरू कराया जा सके।
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भाजपा का शीर्ष नेतृत्व शपथग्रहण के साथ ही जनता को यह संदेश भी देना चाहता है कि सूबे में सिर्फ सत्ता ही नहीं बदली है बल्कि सरकारी मशीनरी की कार्य संस्कृति भी बदली है। इसी कारण रणनीतिकारों को यूपी में सरकार गठन का ढांचा तैयार करने में कुछ वक्त लग रहा है।
कड़े निर्णयों के साथ आगाज करने की है तैयारी
रणनीतिकार चाहते हैं कि नई सरकार शपथ के साथ ही काम शुरू कर दे। जनता को सरकार के फैसलों का लाभ मिलने लगे। नई सरकार खासतौर से किसानों की कर्जमाफी जैसे फैसले के साथ कुछ अन्य कड़े निर्णयों से सत्ता की पारी शुरू करे ताकि भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था पर कठोर रुख का संदेश निकले।
जनता को अहसास हो कि अब किसी स्तर पर ढिलाई नहीं चलेगी। जो अब तक हुआ है वह नहीं होगा। इनमें आपराधिक छवि वालों पर कठोर कार्रवाई और जेलों में बंद दबंगों की मनमानी पर अंकुश जैसे काम भी शामिल हैं।
इन सब पर भी हो रहा विचार
एक केंद्रीय नेता का कहना है कि विशुद्ध तौर पर भाजपा की बात करें तो 26 वर्षों बाद उप्र में पार्टी को अकेले दम पर पूर्ण बहुमत मिला है। यह उपलब्धि ही नहीं बल्कि हमारे ऊपर जिम्मेदारियों का दबाव भी है।
इसलिए हमारा प्रयास है कि सरकार के शपथ लेने के साथ ही लोगों को बदलाव महसूस होने लगे। जनसमस्याओं से जुड़े मामले एक मेज से दूसरे मेज पर चक्कर न लगाते रहें बल्कि उनके परिणाम तत्काल जनता तक पहुंचे। पर, मुश्किल यह है कि बीते 14 वर्षों में सरकार चलाने वाली सपा और बसपा ने पूरे तंत्र को चौपट करके रख दिया है।
पूरी तरह से चरमरा गया है सिस्टम
- फोटो : अमर उजाला
केंद्रीय मंत्री का कहना है कि नौकरशाही से लेकर पुलिस तक का ढांचा पूरी तरह चरमराया हुआ है। जनता को सरकार के फैसलों का त्वरित लाभ पहुंचाने के लिए पूरी व्यवस्था को दुरुस्त करना पड़ेगा।
इसके लिए बदलाव भी करने पड़ेंगे ताकि सरकारी मशीनरी संभालने वाले तंत्र में महत्वपूर्ण स्थानों पर ऐसे अधिकारी बैठाए जा सकें जो सरकार के फैसलों के परिणाम जनता तक जल्द से जल्द पहुंचाने में रुचि लें और इसमें सक्षम हों।
इसके लिए सरकार को ऐसे लोगों को महत्वपूर्ण विभागों का मंत्री बनाना होगा जो प्रभावी हों और इन कामों को अंजाम तक पहुंचा सकें।
नई सरकार को किसानों की कर्ज माफी के अलावा कुछ अन्य कामों पर तत्काल ध्यान देना होगा। इसमें शहरों से लेकर गांवों तक बिजली आपूर्ति में सुधार, थाना, तहसील और जिलाधिकारी कार्यालयों के कामकाज में सुधार, कानून-व्यवस्था से छेड़छाड़ करने वालों पर कठोर कार्रवाई जैसे काम शामिल हैं। इनमें देरी सरकार की आलोचना का कारण बनेगी।
जानकारी के मुताबिक, भगवा टोली के रणनीतिकार यह भी चाहते हैं कि 1991 में कल्याण सिंह सरकार के समय लागू की गई ग्राम सचिवालय व्यवस्था को प्रभावी तरीके से फिर अमल में लाया जाए ताकि गांव वालों को तहसील और जिला मुख्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें।
साथ ही इन सब कामों को जमीन पर उतारने में विधायकों की भूमिका भी तय की जाए और उन्हें इससे जोड़ा जाए। इससे अधिकारी या कर्मचारी कोई गड़बड़ नहीं कर सकेंगे।
भाजपा के प्रदेश महामंत्री विजय बहादुर पाठक कहते हैं कि जनता की अपेक्षाएं बढ़ी हैं। उन्हें भरोसा है कि मोदी व अमित शाह के मार्गदर्शन में प्रदेश की भाजपा सरकार जन अपेक्षाओं पर खरा उतरेगी। थानों और तहसीलों में सुनवाई होगी।
अपराधियों पर सख्ती होगी और समस्याओं का शीघ्रता से समाधान होगा। हमारी कोशिश है कि सरकार बनने के साथ ही जनता बदलाव महसूस करे।