यूपी में जब-जब सत्ता बदली एक ऐसा दाग छोड़कर गई जो पूर्व हो रहे मुख्यमंत्री के लिए बदनामी का सबब बना। कानून-व्यवस्था को छोड़कर कार्यवाहक मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की छवि साफ सुथरी रही। लेकिन जाते-जाते गायत्री नाम का ऐसा दाग लगा जो सबसे ज्यादा उभरा।
गायत्री को भ्रष्टाचार के आरोप में मुख्यमंत्री ने हटाया भी था, लेकिन दबाव में उन्हें दोबारा मंत्री बनाना पड़ा। लेकिन दो फेस के चुनाव के बाद गायत्री के कारनामे सामने आने लगे।
एक महिला की शिकायत पर सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ पुलिस को मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। 18 फरवरी को आए इस आदेश को विरोधी पार्टियों ने मुद्दा बनाना शुरू कर दिया।
यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसका जिक्र अपने मंच से किया। ऐसा नहीं है कि यह पहला मामला है, जब किसी पार्टी की सत्ता जाते-जाते किसी मंत्री का कारनामा सामने आया हो।
मायावती सरकार में इनका भ्रष्टाचार आया सामने
मायावती
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2011 में मायावती सरकार के कद्दावर मंत्री कहे जाने वाले बाबू सिंह कुशवाहा पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा। मामला तब सामने आया जब दो सीएमओ की हत्या राजधानी में हो गई।
इसकी वजह एनआरएचएम घोटाला बनी। सीबीआई ने जांच शुरू की और विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण का चुनाव होते-होते वह सलाखों के पीछे पहुंच गए।
मुलायम के मंत्री पर लगा हत्या का आरोप
2007 के चुनाव से ठीक पहले मुलायम सरकार में मंत्री रहे रालोद के एक नेता पर बलात्कार और हत्या का आरोप लगा। मेरठ युनिवर्सिटी की लेक्चरर कविता रानी चौधरी की हत्या 24 अक्तूबर 2006 को हो गई थी। सूबे में चुनाव की अधिसूचना लागू होने वाली थी।
मुलायम को मंत्री पर लगे आरोप के कारण हटाना पड़ा। सूबे में चुनाव हुए तो विरोधियों ने मुद्दा बनाया और सपा चुनाव हार गई।
मायावती पर लगा ताज कॉरीडोर घोटाले का आरोप
2002 में मायावती ने भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाई। लेकिन डेढ़ साल बाद मायावती ने इस्तीफा दे दिया।
इस दौरान ताज कॉरीडोर मामला चर्चा में रहा। 2002 से पहले सूबे में भाजपा की सरकार थी।
इस सरकार में भी एक महिला नेता के बढ़ते कद को लेकर सियासी गलियारों में खूब चर्चा होती थी। वर्ष 1999 में कल्याण सिंह के हटने का कारण भी इसी महिला नेता को बताया जाता है।