पंचायत चुनाव के बाद भी भाजपाइयों को आराम करने का मौका नहीं मिलेगा। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इनके लिए चुनाव बाद के एजेंडे का खाका भी खींचने का काम शुरू कर दिया है। इसमें संगठनात्मक चुनाव से लेकर चुनावी लिहाज से ढांचे के पुनर्गठन तक का काम शामिल किया गया है। साथ ही केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के लिए पिछले दिनों चलाए गए अभियानों की समीक्षा करने का भी फैसला किया गया है।
राजनीतिक समीक्षकों की मानें तो पंचायत चुनाव के कामकाज की समीक्षा के लिए लखनऊ आए ओम माथुर ने इसके संकेत दे भी दिए हैं। उन्होंने पदाधिकारियों से कहा है कि पंचायत चुनाव के तुरंत बाद संगठनात्मक चुनाव के कामकाज को पूरा करने की तैयारी कर ली जाएं।
जिन लोगों को सीधे तौर पर पंचायत चुनाव की जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई है, उनकी मदद से महासंपर्क अभियान और सदस्यता अभियान के शेष रह गए काम को अभी से पूरा करा लिया जाए। जिससे पंचायत चुनाव के तुरंत बाद संगठनात्मक चुनाव के काम को शुरू किया जा सके।
नेताओं व पार्टी के जुड़े प्रतिनिधियों की भूमिका की होगी समीक्षा
पंचायत चुनाव में संगठन के नेताओं और पार्टी से जुड़े जनप्रतिनिधियों की भूमिका की समीक्षा करने का फैसला किया गया है। यह काम संगठन मंत्रियों के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए अभी से तैयारी करने का सुझाव भी माथुर ने दिया है।
इस काम की मुख्य जिम्मेदारी विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं के ऊपर रहेगी। ये चुनाव के दौरान सांसदों, विधायकों, पूर्व विधायकों, पार्टी के पदाधिकारियों सहित अन्य प्रमुख लोगों के बारे में रिपोर्ट तैयार करेंगे।
चुनाव में मिले वोटों के आधार पर पार्टी की बूथ कमेटियों के पुनर्गठन का फैसला किया गया है। जिन इलाकों में पार्टी को अपेक्षा के अनुरूप वोट नहीं हासिल होंगे, वहां नए सिरे से बूथ कमेटियों का गठन किया जाएगा। साथ ही इस चुनाव से सामने आए निष्कर्षों के आधार पर चुनाव प्रबंधन टीम खड़ी की जाएगी।
केंद्रीय योजनाओं में भागीदारी भी तय करेगी भूमिका
केंद्र सरकार की योजनाओं में भागीदारी भी पार्टी के लोगों की भावी भूमिका निर्धारित करने में कसौटी का काम करेगी। सूबे के नेताओं से कहा गया है कि केंद्र की योजना ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ सहित बीमा, पेंशन की योजनाओं में किसने कितना काम किया और कितने लोगों को इन योजनाओं से जोड़ा, इसकी जानकारी जुटाई जाए।
पार्टी के सांसदों, विधायकों और पदाधिकारियों के बारे में खासतौर से जानकारी जुटाने को कहा गया है। दरअसल, पार्टी की तरफ से इन लोगों को केंद्र की विभिन्न योजनाओं का लक्ष्य दिया गया था। पार्टी नेतृत्व देखना चाहता है कि लक्ष्य को पूरा करने में इन लोगों ने कितनी रुचि ली है।
जिस तरह का एजेंडा तैयार किया किया जा रहा है, उससे साफ है कि भाजपा पंचायत चुनाव के तत्काल बाद संगठन के चुनाव के साथ-साथ चुनावी फीडबैक के आधार पर विधानसभा चुनाव की तैयारियों को भी शुरू कर देना चाहती है। प्रदेश प्रभारी ओम माथुर कहते भी हैं कि परिवर्तन भाषण, पुस्तक टीवी से नहीं होता। परिवर्तन काम करने से होता है।
परिवर्तन के लिए लोगों को पार्टी की नीतियों एवं विषयों के बारे में समझाना पड़ेगा। उनके दिमाग में यह बात बैठानी पड़ेगी कि राजनीतिक पार्टियों का काम सिर्फ राजनीति करना ही नहीं बल्कि लोगों से जुड़े सरोकारों से भी जुड़ना और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ संघर्ष करना है।