भाजपा के प्रदेश प्रभारी अमित शाह ने लखनऊ में 2 मार्च को मोदी की रैली के
बहाने सूबे में संगठन की मजबूती की सच्चाई का सुबूत भी लेने का फैसला किया
है।
उन्होंने बुधवार को यहां मोदी की लखनऊ रैली की तैयारियों पर चर्चा के
दौरान प्रदेश के सभी प्रमुख नेताओं को औसतन पांच-छह जिलों की जिम्मेदारी
देकर भीड़ जुटाने को कहा।
खुद भी दस दिन दस जिलों में डेरा डालने की योजना
बना डाली। कहा कि लखनऊ की रैली ने अगर अब तक हुई रैलियों का रिकॉर्ड तोड़
दिया तो लोस चुनाव में पार्टी की सफलता आसान हो जाएगी।
शायद
ये दो दिन की बैठक के बाद शाह के सामने आई सच्चाई का निष्कर्ष ही था कि
उन्होंने मोदी की लखनऊ रैली को संगठनात्मक सच्चाई जानने की कसौटी बना लिया।
उन्होंने जो कुछ कहा और जिस तरह नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी, उससे इस बात
की पुष्टि होती है।
शाह ने पार्टी के प्रमुख नेताओं और संगठन मंत्रियों से
कहा कि लखनऊ में रैली के लिए जिस स्मृति उपवन का चयन किया गया है, उसका
क्षेत्रफल 72 एकड़ है।
इसको भरने के लिए 12 लाख लोग चाहिए, पर पार्टी का
राष्ट्रीय नेतृत्व चाहता है कि 18 से 20 लाख लोगों का लक्ष्य लेकर तैयारी
की जाए। इसके लिए प्रत्येक बूथ से कम से 10 लोगों को लखनऊ लाने का लक्ष्य
रखा जाए।
पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में
काम करें
शाह ने कहा कि रैली से पहले सभी बूथों पर बैठकें कर ली जाएं।
भाजपा प्रवक्ता विजय पाठक ने बताया कि शाह 20 जनवरी को अमरोहा, 21 को
बिजनौर, 24 को देवरिया, 25 को बलिया, 26 को गाजीपुर, 3 फरवरी को बरेली, 4
को शाहजहांपुर, 5 को लखनऊ, 6 को फतेहपुर और 7 फरवरी को अलीगढ़ में रहेंगे।
प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी 20 जनवरी को बस्ती, 25 को
मुजफ्फरनगर, 3 फरवरी को मथुरा, 4 को कानपुर, 7 को अमेठी और 8 फरवरी को
सुल्तानपुर में रहेंगे। जिलों व बैठकों की तारीखें भी तय कर दी गई हैं।