विकास का दंभ भरने वाली भाजपा ने चुनावी वैतरणी पार करने के लिए पूरा ताना बाना परंपरागत अगड़े वोट के साथ पिछड़ों व दलितों के इर्द गिर्द बुना है। पार्टी ने 380 प्रत्याशियों में 166 टिकट अगड़ों को दिए हैं तो अति पिछड़ों को 102 से ज्यादा सीटों पर भगवा चेहरा बनाया है।
इसमें भी दलित वर्ग में सबसे ज्यादा 26 पासी समाज का उम्मीदवार खड़ा किया है। धोबी और कोरी समाज को भी अच्छी संख्या में टिकट दिए गए हैं। मायावती के वोट बैंक जाटव को भी भाजपा ने 17 टिकट देकर सेंधमारी की कोशिश की है।
बसपा के मौर्य वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए बसपा सरकार में मंत्री रहे स्वामी प्रसाद मौर्य को भाजपा में शामिल कर उन्हें कुशीनगर की पडरौना सीट से मैदान में उतारा है तो उनके बेटे उत्कर्ष मौर्य को रायबरेली के ऊंचाहार से टिकट दिया है।
पार्टी ने मौर्य, सैनी, शाक्य समाज को 27 से अधिक टिकट दिए हैं। 15 से अधिक लोधी प्रत्याशियों को टिकट दिया है। इनमें कल्याण सिंह के पौत्र संदीप सिंह, डॉ. डीसी वर्मा और राकेश उत्तम लोधी शामिल हैं।
कुर्मी समाज को भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व देते हुए 25 से ज्यादा टिकट दिए गए हैं। कुर्मी समाज सेे संजय गंगवार और केसर सिंह गंगवार को मैदान में उतारा है। इनके अलावा राजभर, प्रजापति, निषाद समाज के लोगों को भी उनकी जनसंख्या के अनुपात में पर्याप्त टिकट दिए गए हैं।
15 जाट व 6 गूजरों को भी टिकट दिए गए हैं। भाजपा ने पासी समाज को 23, धोबी आठ, खटिक 5, कोरी समाज को आठ, जाटव समाज को 15, वाल्मीकि समाज को 10 तथा सोनकर समाज को7 टिकट दिए हैं।