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भाजपा जनता को समझाएगी नागरिकता कानून का सच और जनमत भी बनाएगी

Sun, 22 Dec 2019 03:56 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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नागरिकता कानून का समर्थन करते लोग। - फोटो : amar ujala
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भारतीय जनता पार्टी ने नागरिकता संशोधन कानून पर जगह-जगह हो रहे हिंसक विरोध को देखते हुए इस मुद्दे पर लोगों को सच समझाने और उन्हें सही तथ्य बताने का फैसला किया है। इस संबंध में पूरी योजना का खाका खींचा जा रहा है।

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दस दिनों के विशेष अभियान के तहत प्रदेश के हर जिले में संगोष्ठी और कुछ स्थानों पर सभाएं करके इस कानून के समर्थन में जनमत बनाने की कोशिश होगी। साथ ही उपद्रवियों की नीति, नीयत और मंशा पर सवाल उठाकर इन्हें समाज के जरिये ही कठघरे में खड़ा करने की कोशिश होगी। इसके लिए प्रदर्शन में शामिल लोगों की मीडिया के सामने बयां की गई सच्चाई को बताते हुए विरोध करने वालों की पोल भी खोलने की तैयारी है।

भाजपा नेता लोगों को बताएंगे कि देश का बंटवारा ही धर्म के आधार पर हुआ था। जिन मुसलमानों को धार्मिक आधार पर बन रहे इस्लामी देश पाकिस्तान में रहना ठीक लगा तो वे वहां बस गए। जिन्हें देश का बंटवारा ठीक नहीं लगा, वे मुसलमान देश से नहीं गए। इसलिए पाकिस्तान और बांग्लादेश में रहने वाले मुसलमानों की प्रताड़ना का तर्क स्वीकार नहीं किया जा सकता। वैसे भी किसी को यदि भारत की नागरिकता लेनी है तो उसके लिए पहले से ही कानून हैं। इसके तहत कई लोगों ने नागरिकता ली भी है। पर, इन देशों में रहने वाले हिंदू, बौद्ध, जैन, पारसी और सिख समाज के लोगों को आज तक मौलिक अधिकार भी नहीं दिए गए। साथ ही उत्पीड़न किया गया जिसके चलते कई लोग वहां से भारत आ गए और शरण ले ली।

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'यह कानून नागरिकता देने वाला है, किसी की नागरिकता छीनने वाला नहीं'

प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह। - फोटो : amar ujala
स्वतंत्र देव कहते हैं कि इनमें कई के पास पाकिस्तान या बांग्लादेश अथवा अफगानिस्तान की नागरिकता का भी कोई प्रमाण पत्र नहीं हैं, क्योंकि ज्यादातर के पिता या बाबा आए थे। इसलिए उनकी मृत्यु के बाद उनके वंशजों के पास नागरिकता का कोई प्रमाण पत्र ही नहीं है। ऐसे लोगों को नागरिकता देने के लिए यह कानून लाया गया है।

यह कानून नागरिकता देने वाला है, किसी की नागरिकता छीनने वाला नहीं। फिर भी कुछ लोग इस पर भ्रम फैलाकर माहौल खराब कर रहे हैं। वैसे भी कांग्रेस सहित ज्यादातर विपक्षी दलों ने मुसलमानों को हमेशा वोट बैंक ही समझा। अब जब मुस्लिम समाज सच्चाई समझकर उनसे दूर हट रहा है तो ये भ्रम फैलाकर मुस्लिम समाज को भड़का रहे हैं। पर, मुस्लिम समाज अब इनके झूठ में नहीं फंसेगा।

मुस्लिम धर्मगुरुओं की मदद लेंगे

- फोटो : amar ujala
संगठन के अलावा सरकार भी इस मुद्दे पर कानून के पक्ष में जनमत बनाने में लग गई है। उसने पहले ही उपद्रव और अशांति फैलाने वालों को कानून की सख्ती से समझाने और शांति से समझने वालों को संवाद के जरिये सच्चाई बताने की घोषणा करते हुए मंत्रियों को इसकी जिम्मेदारी सौंप रखी है। अब भाजपा भी अगले सप्ताह से अभियान शुरू करने जा रही है।

इसके तहत सिर्फ हिंदुओं को ही नहीं, बल्कि मुस्लिम धर्मगुरुओं की मदद से मुस्लिम समाज के बीच भी इस कानून के सच को पहुंचाकर भ्रम दूर करने की रणनीति बनी है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह पिछले तीन दिनों में कई मुस्लिम प्रतिनिधिमंडलों से मिलकर उनसे मुस्लिम समाज के बीच पूरे और सही तथ्य रखने का आग्रह कर चुके हैं।

उधर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पहल पर उससे संबद्ध संगठनों ने भी ‘नागरिक विचार मंच’ के जरिये इस मुद्दे पर जनमत बनाने का काम शुरू कर दिया है।

तीन करोड़ परिवारों तक जाएगी भाजपा

भाजपा अगले 10 दिन तक  तीन करोड़ परिवारों को कानून की हकीकत से रूबरू कराएगी। भ्रम दूर करने के लिए देशभर में 250 प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। हर जिले इसके पक्ष में रैली और कार्यक्रमों का भी आयोजन होगा। सूत्रों ने बताया कि भाजपा की योजना छह महीने तक इस कानून के संदर्भ में लगातार अभियान चलाने की है। महासंपर्क अभियान के तहत राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर कार्यक्रम होंगे।

मूल स्वरूप रहेगा कायम
सरकार का मानना है कानून के स्वरूप में खास बदलाव नहीं होगा। पूर्वोत्तर और खासतौर से असम के आंदोलनकारियों को कानून को लेकर कुछ संशय है। सरकार पहले ही इनर लाइन परमिट, अनुसूची छह वाले इलाकों को इस कानून के दायरे से बाहर कर दिया है। इनकी चिंताओं को दूर करने के लिए सरकार कानून में कुछ नए उपबंध कर सकती है।
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जब-जब मोदी का विरोध हुआ, भाजपा को फायदा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : Twitter
पार्टी नेताओं का कहना है कि 2014 से विपक्ष जब भी पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ एकजुट हुआ, तब लाभ भाजपा को ही मिला। नोटबंदी, सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक जैसे तीन अहम मुद्दे विपक्ष पर भारी पड़े। इस मामले में भी कई विपक्षी दल पीएम और सरकार के खिलाफ एकजुट हैं। जबकि जमीनी सच्चाई यह है कि बहुमत इस कानून के साथ है।

विशेष वर्ग और इलाकों तक सीमित विरोध: पार्टी नेताओं के मुताबिक विरोध एक विशेष वर्ग और विशेष इलाकों तक सीमित है। असम जहां सबसे ज्यादा विरोध हुआ वहां लाखों लोग एनआरसी में नाम दर्ज कराने में नाकाम रहे हैं। बिहार, यूपी, प.बंगाल, कर्नाटक और आंध्र में ही विरोध दिखा।
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