जानकारी के मुताबिक, सुनील बंसल ने एक दर्जन सांसदों के पार्टी के अभियानों में दिलचस्पी न लेने की जानकारी दी। बैठक में कई सांसदों द्वारा अपने-अपने क्षेत्रों के विकास कार्यों में दिलचस्पी न लेने का मुद्दा भी उठा।
कहा गया कि पिछले दिनों गांव में रात्रि निवास अभियान में कई सांसद नहीं गए। कुछ गए तो रात में वहां रुके नहीं। कुछ के समानान्तर संगठन खड़ा करने से हो रहे नुकसान पर भी चर्चा की गई।
कई सांसदों द्वारा अपनी क्षेत्र विकास निधि को खर्च करने में रुचि नहीं लेने की बात भी उठी। महामंत्री ने बताया कि संगठन इनकी रिपोर्ट तैयार करा रहा है। गांवों को गोद लेने के मामले में सांसदों की हीलाहवाली का मामला भी उठा।
कुछ सांसदों का विधायकों और कार्यकर्ताओं से तालमेल तथा संवाद व संपर्क न रखना भी भाजपा नेतृत्व के लिए चिंता की वजह है। कई जिलों के पदाधिकारी यह शिकायत कर चुके हैं कि उनके यहां के सांसद अपने निजी समर्थकों का गुट बनाकर काम करते हैं। कई विधायक भी यही करते हैं।
इस कारण संगठन की साख प्रभावित हो रही है। यह स्थिति चुनाव में संकट बढ़ा सकती है। सावित्री बाई फुले सहित कुछ सांसद अपनी बयानबाजी से भाजपा की मुसीबत बढ़ा रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, ऐसे सभी सांसदों की जगह नए लोगों को चुनाव लड़ाने की नीति बनी है। यह भी तय हुआ कि यदि रणनीति या समीकरणों के लिहाज से किसी को चुनाव लड़ाना जरूरी हो तो उसका क्षेत्र बदल दिया जाए।