भारतीय जनता पार्टी गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र
मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने के साथ संगठनात्मक स्तर पर भी
‘गुजरात मॉडल’ लागू करने जा रही है।
इसके तहत नेताओं को प्रत्याशी
नहीं बल्कि बूथ जीताने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। प्रांतीय नेताओं को
गुजरात मॉडल का मसौदा बता दिया गया है। अब उसे पूरे उत्तर प्रदेश में लागू
करने की तैयारी है।
लोकसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा लगातार प्रयोग
कर रही है। दबी जुबान से ही सही, पर राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने
नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया है।
प्रधानमंत्री
पद के उम्मीदवार के रूप में मोदी के सामने आते ही संगठनात्मक स्तर पर भी
सक्रियता बढ़ गई है। संगठन को सक्रिय करने के लिए गुजरात मॉडल चुना गया है।
पार्टी
से जुड़े सूत्रों की मानें तो केंद्रीय नेताओं में विभिन्न स्तर पर हुई
वार्ता के दौरान यूपी में गुटबाजी खत्म कर संगठन को सक्रिय करने के लिए
‘गुजरात मॉडल’ सबसे कारगर साबित हुआ।
इस मॉडल को उत्तर प्रदेश के
अलावा राजस्थान, उत्तराखंड, बिहार सहित अन्य प्रदेशों में लागू किया जाएगा।
यूपी में गुजरात मॉडल की धमक सुनाई पड़ने लगी है। पिछले माह लखनऊ पहुंचे
नरेंद्र मोदी के सिपहसालार और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और
यूपी के पार्टी प्रभारी अमित शाह पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मशविरा भी कर
चुके हैं।
प्रांतीय नेताओं के निर्देश के बाद गुजरात माडल को जिले
से लेकर मंडल स्तर तक उतारने की तैयारी हो गई है। भाजपा के क्षेत्रीय
महामंत्री सत्यपाल सिंह अनौपचारिक बातचीत में इसकी पुष्टि भी करते हैं।
वह
कहते हैं कि गुजरात में नेता के बजाय बूथ स्तर पर ध्यान केंद्रित करने से
लगातार विजय मिल रही है। अब इसे लोकसभा चुनाव में भी आजमाया जा रहा है।
इसके तहत पार्टी प्रत्याशी को जिताने के बजाय बूथ जिताने की जिम्मेदारी
सौंपी जा रही है।
बूथवार नेताओं की जिम्मेदारी तय होगी। जिला कमेटी
के भरोसे बैठने के बजाय अब संगठन का जिम्मा संभालने वाले प्रांतीय एवं
क्षेत्रीय पदाधिकारी बूथ प्रभारी से सीधे संपर्क में रहेंगे। इसके लिए बूथ
प्रभारियों की प्रांतीय कार्यालय में भेजी जा रही लिस्ट में बाकायदे पता
एवं मोबाइल नंबर भी भेजा जा रहा है।