सरकार बिजली व्यवस्था को बेहतर करने के लिए पानी की तरफ पैसा बहा रही लेकिन फिर भी जनता बिजली संकट से जूझ रही है। इसके प्रमुख कारण मानकों की अनदेखी और जिम्मेदार इंजीनियरों की लापरवाही है।
इनके चलते नई-नई लाइनों के केबल बक्से दग रहे हैं जिससे इलाके केलोगों को 8-8 घंटे तक अंधेरे में रहना पड़ता है। इसके बाद भी इंजीनियर मूकदर्शक बने हैं और ठेकेदार मनमाने तरीके से भूमिगत केबल को बिछाने के कार्य में जुटे हैं।
यह कहानी लेसा (लखनऊ इलेक्ट्रिक सप्लाई अथॉरिटी) के अव्यवस्था की है। जिसकी गवाह बालाघाट उपकेंद्र की नई 33 केवी लाइन है। लेसा ने इस लाइन पर पौने पांच करोड़ रुपए खर्च किए लेकिन 21 जुलाई को 12 घंटे से कम वक्त में इसने धोखा दे दिया।
क्षेत्रीय इंजीनियरों के अनुसार तो केबल का बक्सा दगने के कारण बिजली आपूर्ति में अवरोध आया। इससे पहले 14 जुलाई को महानगर उपकेंद्र की 33 केवी भूमिगत लाइन का केबल बक्सा दग गया जिससे 12 घंटे बिजली बंद रही।
यह लाइन करीब डेढ़ साल पहले ही बनी थी। लेसा प्रशासन ने महानगर की डेढ़ साल पुरानी लाइन में केबल बक्सा दगने की घटना से सबक नहीं लिया जिसके चलते भविष्य में जनता को बिजली संकट से छुटकारा नहीं मिलेगा।
इस प्रत्यक्ष उदाहरण हनुमान सेतु उपकेंद्र के इलाके में पड़ रही 33 केवी भूमिगत लाइन है।