यूपी में सत्ता हासिल करने की कोशिश में जुटी भगवा टोली ने चुनावी समर के अंतिम पड़ाव पर पूरी ताकत झोंक दी है। वोटों की गोलबंदी जिस-जिस तरह से हो सकती है, हर उस जतन पर भगवा टोली की नजर ही नहीं है बल्कि काम भी किया जा रहा है।
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हर उस दांव को आजमाया जा रहा है, जिससे अंतिम दो चरणों की 89 सीटों में ज्यादा से ज्यादा पर कमल खिलाया जा सके। कोशिश जहां प्रधानमंत्री मोदी समेत बड़े नेताओं की ज्यादा से ज्यादा सभाएं करके वोटों को लामबंद करने की है तो जमीन पर कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं की टोलियों पर लोगों से संपर्क व संवाद के जरिये उन्हें भाजपा के पक्ष में मतदान के लिए तैयार करने की जिम्मेदारी डाली गई है।
दरअसल, अंतिम दो चरण के चुनाव भाजपा के लिए हर लिहाज से काफी महत्वपूर्ण हैं। बहुमत के आंकड़े को छूने के लिए इस इलाके में पार्टी का बेहतर प्रदर्शन तो जरूरी है ही, उससे ज्यादा महत्वपूर्ण इस इलाके से जुड़े भाजपा के तमाम बड़े चेहरों की साख बनाए रखने का सवाल भी है।
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यही नहीं, भाजपा के सामने माफिया और दबंग चेहरों को शिकस्त देकर यह साबित करने की चुनौती भी खड़ी है कि वही इन्हें सबक सिखा सकती है। भगवा टोली को यह भी साबित करना है कि लोकसभा चुनाव में इस इलाके में उसके पक्ष में यूं ही हवा नहीं बही थी। उसके पीछे लोगों में भाजपा की रीति-नीति पर भरोसा बढ़ना भी है।
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यहीं है पीएम मोदी का संसदीय क्षेत्र व कई बड़े नेता यहीं के
- फोटो : self
पूर्वांचल के मोर्चे पर भगवा टोली की तरफ से पूरी ताकत झोंकने के पीछे कुछ प्रमुख वजहें हैं। एक तो इसी इलाके में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है तो केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह व कलराज मिश्र भी मूल रूप से इसी इलाके के रहने वाले हैं।
पूर्वांचल के प्रमुख भगवा चेहरे आदित्यनाथ तो इस इलाके में रहते ही हैं, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश सिंह, सूर्यप्रताप शाही और डॉ. रमापति राम त्रिपाठी का घर भी इसी हिस्से में आता है।
केंद्र की भाजपा सरकार ने पूर्वांचल के विकास और यहां के लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए कई सारे काम भी शुरू कराए हैं। चुनाव से पहले खुद मोदी इस इलाके के अलग-अलग जिलों में कई सभाएं कर चुके हैं।
विकास कार्यों के अलावा गरीब महिलाओं को मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन उपलब्ध कराने वाली उज्ज्वला योजना की शुरुआत भी उन्होंने इसी इलाके से की थी। छठे व सातवें चरण में जिन 89 सीटों पर चुनाव हो रहा है, उनमें 2012 में भाजपा को सिर्फ 12 सीटें ही मिली थीं।
आजमगढ़, मऊ, गाजीपुर, मिर्जापुर, भदोही, सोनभद्र जैसे जिलों में तो उसे एक भी सीट नहीं मिली थी। इसीलिए भाजपा की कोशिश पूरी ताकत झोंककर इस इलाके की ज्यादा से ज्यादा सीटों पर कब्जा करने की है।
मुख्तार के दबाव से मुक्त कराना एक मकसद
मुख्तार अंसारी
- फोटो : अमर उजाला
ध्यान देने की बात यह है कि यहां से बसपा के टिकट पर आपराधिक छवि वाले मुख्तार अंसारी लड़ रहे हैं। इसी इलाके की दो अन्य सीटों पर उनके भाई व पुत्र भी बसपा से उम्मीदवार हैं।
ऐसा लगता है कि मऊ में मोदी की रैली के पीछे प्रमुख वजह इस इलाके के मतदाताओं को मुख्तार के दबाव से मुक्त करके मतदान के लिए प्रोत्साहित करना है। मुख्तार के अलावा श्यामनारायण सिंह उर्फ विनीत सिंह, धनंजय सिंह, अतुल राय, अमनमणि जैसे आपराधिक छवि वाले चेहरे अलग-अलग जगह से मैदान में उतरे हैं।
मुन्ना बजरंगी ने अपनी पत्नी को मैदान में उतारकर तो उमाकांत यादव ने बेटे के जरिये अलग-अलग सीटों पर दांव लगाया है। भाजपा के रणनीतिकारों को पता है कि इनके कारण भी चुनाव प्रभावित हो सकता है।
शायद यही वजह है कि बड़े नेताओं की सभाओं के साथ कई केंद्रीय मंत्रियों व प्रमुख नेताओं को अलग-अलग सीट पर लगाकर वहां भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने की तैयारी की गई है।
प्रधानमंत्री 27 फरवरी को मऊ में रैली करेंगे। 1 मार्च को वे महराजगंज व देवरिया में सभा करेंगे। 3 मार्च को मिर्जापुर में और 4 मार्च को जौनपुर में उनकी सभा होनी है।
जौनपुर में सभा के बाद वे अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी आ जाएंगे और रात में वहीं रुकेंगे। 5 मार्च को वाराणसी में उनकी सभा व रोड शो का कार्यक्रम है।
प्रधानमंत्री के अलावा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, कलराज मिश्र, उमा भारती, गोरक्षपीठ के महंत आदित्यनाथ सहित कई केंद्रीय मंत्रियों और पार्टी के प्रमुख नेताओं के कार्यक्रम भी अलग-अलग इलाकों में तय हैं।