सांगठनिक विस्तार और चुनावी सफलता का एजेंडा लेकर लखनऊ आए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने राम से लेकर जयश्री राम से समीकरण साधे। अलग-अलग हुई बैठकों और कार्यक्रमों में कार्यकर्ताओं को संवेदनाओं और सरोकारों पर काम करने के महत्व के समीकरण बताए। निर्देश, नसीहत व सचेत करते हुए उन्हें एक-दूसरे के सुख-दुख में शामिल होने का सियासी गुणा-भाग भी समझाया।
उन्होंने न सिर्फ डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पं. दीनदयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी के नामों के सहारे सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर आगे बढ़ने का संदेश दिया, बल्कि शब्दों और संकेतों से इस एजेंडे को और धार देने की कोशिश की।
पार्टी के एजेंडे में शामिल रहे अयोध्या मुद्दे पर मिली सफलता और श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण की शुरुआत के घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए उन्होंने बूथ अध्यक्षों के कार्यक्रम में विपक्ष की भूमिका को कठघरे में खड़ा किया। कार्यक्रम में जिस तरह जय श्रीराम के नारों से गूंजा उससे यह साफ हो गया कि नड्डा की सांकेतिक भाषा को कार्यकर्ताओं ने ठीक से समझ लिया है।
इस तरह की कोशिश
कार्यकर्ता से राष्ट्रीय अध्यक्ष तक पहुंचे नड्डा ने जवाबी नारों और शब्दों से कार्यकर्ताओं को यह संदेश दे दिया कि उनके मनोभाव और सरोकार से वे अलग नहीं है। नड्डा ने सीएम योगी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव और दोनों उप मुख्यमंत्रियों के साथ पार्टी मुख्यालय में एक कलाकार द्वारा लाई गई भगवान राम की प्रतिमा की पूजा-अर्चना कर इस संदेश को और गाढ़ा कर कार्यकर्ताओं तक पहुंचाया।