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UP: 'बिगबॉस' सुधरें तो बदल जाएगी भाजपा की किस्मत

Wed, 24 Sep 2014 11:07 AM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
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विधानसभा उपचुनाव में हुई हार के लिए प्रभारियों ने बड़े नेताओं और कई सांसदों व कुछ जिलों के संगठन के पदाधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है। आम तौर पर सभी ने कहा कि बड़े नेता सुधर जाएं तो पार्टी की हालत सुधर सकती है। ऐसा नहीं किया गया तो पार्टी बार-बार हारती रहेगी।
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प्रभारियों का कहना था कि चहेतों को टिकट न मिलने से कई सांसद नाराज रहे और उन्हें जहां लगाया गया वहां पहुंचे ही नहीं। कई बड़े नेताओं को उपचुनाव में प्रचार करने में अपनी तौहीन लगी। इसका भी खामियाजा उठाना पड़ा। देर से प्रत्याशी घोषित करने का भी नुकसान हुआ।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी व प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल ने मंगलवार को प्रदेश कार्यालय में हुई बैठक में उपचुनाव में पार्टी के पराजय के कारणों की समीक्षा की।
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इस दौरान प्रभारियों ने जीती व हारी सभी सीटों से भितरघातियों के नाम प्रदेश अध्यक्ष को सौंपे। विधानसभा की 11 सीटों के उपचुनाव में भाजपा को सिर्फ तीन सीटें मिली हैं। शेष आठ पर सपा प्रत्याशी विजयी रहे। ये सभी सीटें भाजपा की थीं।
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उमा भारती पर भी निशाना

बैठक में उमा भारती का उदाहरण देते हुए कहा गया कि वे सांसद भी नहीं आए जिनके लोकसभा सदस्य चुने जाने के बाद उस सीट पर उपचुनाव हो रहा था। वहीं कई नेता खुद तो आए नहीं और ऊपर से अपने लोगों को भी काम करने से मना कर दिया।

प्रत्याशियों और संगठन में नहीं था तालमेल: पहले चरण में सामूहिक समीक्षा के बाद प्रदेश अध्यक्ष व प्रदेश महामंत्री (संगठन) ने एक-एक सीट के प्रभारियों को बुलाकर उनसे बातचीत की।

जानकारी के अनुसार, निजी बातचीत में ज्यादातर प्रभारियों ने कहा कि प्रत्याशियों और स्थानीय संगठन के बीच तालमेल न होने का खामियाजा भी पार्टी को भुगतना पड़ा है। मैनपुरी व मुरादाबाद जैसे कई स्थानों पर संगठन नहीं दिखा। बूथ कमेटियां ज्यादातर जगह नहीं दिखीं।
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सत्ता पक्ष ने चुनाव में की गड़बड़ी

देर से प्रत्याशी घोषित करना भारी: बैठक में कहा गया कि नामांकन के एक दिन पहले उम्मीदवार घोषित हुए। उन्होंने अंतिम दिन नामांकन किया। इसके चलते चुनाव प्रबंधन ठीक से नहीं हो पाया।

रोहनिया में अपना दल की अंतर्कलह और भाजपा के कुछ लोगों द्वारा संगठन के निर्देश के बजाय मनमर्जी से काम करने का खामियाजा भुगतना पड़ा।

हमीरपुर व चरखारी के बारे में शिकायत थी कि एक जगह प्रत्याशी का चेहरा तो दूसरी जगह प्रत्याशी का कार्यकर्ताओं से संपर्क न होना पराजय का कारण बना।
 
सत्ता का दुरुपयोग: प्रभारियों ने कहा कि सत्तापक्ष के लोगों ने उपचुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बनाकर लड़ा। उन्होंने सत्ता की शक्ति का जमकर दुरुपयोग किया। पुलिस और बीएलओ तक ने मंत्रियों के इशारे पर काम किया। कई जगह घरों पर चुनाव आयोग की मतदाता पर्ची ही नहीं पहुंचाई गई।
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