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मिशन यूपी के लिए जुटेंगे भाजपाई, लेंगे फाइनल रूट!

Sun, 01 Mar 2015 11:48 PM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
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भगवा रणनीतिकारों ने चुनौतियों से मुक्ति के लिए एक बार फिर चिंतन का मन बनाया है। इसके लिए अयोध्या जैसे पवित्र माने जाने वाले चित्रकूट धाम का चयन किया गया है।
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7 व 8 मार्च को भाजपा के प्रदेश पदाधिकारी, क्षेत्रीय अध्यक्ष व क्षेत्रीय संगठन मंत्री मंदाकिनी नदी के तट पर जुटेंगे और दो दिन तक पार्टी की उपलब्धियों व चुनौतियों को सामने रखकर उसका विश्लेषण व चिंतन करेंगे।

चिंतन में संघ से जुड़े लोगों के भी शामिल होने की उम्मीद है। पूर्व प्रदेश अध्यक्षों और कुछ अन्य प्रमुख पूर्व पदाधिकारियों को भी इस बैठक में बुलाया गया है।
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बैठक में सदस्यता अभियान की समीक्षा के साथ पंचायत चुनाव और उसके बाद विधानसभा चुनाव के मद्देनजर विचार-विमर्श किया जाएगा।
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इन मुद्दों पर होगी खास चर्चा

सदस्यता अभियान की समीक्षा के दौरान उन क्षेत्रों में भाजपा की पकड़ मजबूत बनाने पर भी चर्चा होगी जहां के बूथों पर अपेक्षित सदस्यता नहीं हो पाई है अथवा लोकसभा चुनाव में वोटों का आंकड़ा सौ का अंक नहीं छू पाया था।

नतीजों से चिंतित : दरअसल, लोकसभा के बाद प्रदेश में हुए चुनाव में भाजपा बहुत चमत्कार नहीं दिखा पाई है। लोकसभा चुनाव के ठीक बाद प्रदेश में विधानसभा की 12 सीटों के उपचुनाव में पार्टी सिर्फ तीन सीट ही जीत सकी।

यह शिकस्त भाजपा के लिए इसलिए भी बहुत करारी मानी जाने वाली रही क्योंकि इन सभी सीटों पर भाजपा के ही विधायक थे। इसलिए तीन सीटों की जीत की खुशी से कहीं ज्यादा झटका भाजपा के हाथों से नौ सीटों का छिन जाना रहा।
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चुनाव नतीजों ने खोली आंख

उपचुनाव में भाजपा की हार को भगवा खेमे के रणनीतिकार सूबे में सपा की सरकार होने का नतीजा मान रहे थे। इनका मानना था कि सपा को ग्रामीण क्षेत्र के चुनाव होने का लाभ भी मिला है, लेकिन जब छावनी परिषद जैसे शहरी इलाकों के चुनाव में भी भाजपा साफ हो गई तो भगवा रणनीतिकारों के कान खड़े हुए।

ऊपर से दिल्ली की हार ने तो रणनीतिकारों के हाथ के तोते ही उड़ा दिए। माना जा रहा है कि इन्हें अंदाज हो गया है कि पार्टी नेता लोकसभा चुनाव के नतीजों की खुमारी में डूबकर हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे।

वे सोचते रहे कि लोकसभा चुनाव में बना माहौल 2017 में भी भाजपा की चुनावी नैया पार लगा देगा। लेकिन इन चुनावों ने हकीकत सामने ला दी। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए यह चिंतन बैठक बुलाई गई है।
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