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भाजपा ने मजदूरों के दर्द को बनाया इवेंट, सिर्फ कागजों में दिए रोजगारः अखिलेश

Sun, 28 Jun 2020 12:32 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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अखिलेश यादव - फोटो : अमर उजाला
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समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि प्रदेश में भाजपा सरकार ने मजदूरों के दर्द को इवेंट बना दिया। गोंडा, बस्ती, गोरखपुर, बहराइच, संतकबीरनगर व जालौन के मजदूर बता रहे हैं कि उन्हें रोजगार नहीं मिला है। सरकार ने सिर्फ कागजों पर ही रोजगार दिया है। मजदूरों की मुसीबतों को भाजपा सरकार अपने राजनीतिक हित साधन में प्रयोग कर रही है।

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अखिलेश ने शनिवार को जारी एक बयान में कहा कि भाजपा की राज्य सरकार का सत्ता में चौथा वर्ष चल रहा है। इस अवधि में वह जनहित की एक भी योजना सामने नहीं ला सकी है। जनता को केवल बहकाने का काम सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है। मनरेगा में लोगों को नाम मात्र के अस्थायी रोजगार का दिलासा देने की जगह भाजपा बताए कि तथाकथित इंवेस्टमेंट समिट और डिफेंस एक्सपो के बाद हुए कितने करार सच में बैंकों के सहयोग से जमीन पर उतरे हैं, उनसे कितनों को रोजगार मिला है ? 

उन्होंने कहा कि जनता की बदहाली, अर्थव्यवस्था की बिगड़ती स्थिति पर, नौजवानों में बढ़ती हताशा पर ध्यान देने के बजाय केंद्र-राज्य की भाजपा सरकारें अव्यवहारिक व अवास्तविक अभियान चलाकर अपनी विफलता को छिपाना चाहती है। प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री, बस एक दूसरे की प्रशंसा करके खुश हो रहे है। उनके अच्छे दिन चल रहे हैं जबकि जनता दुखी, हताश एवं निराश है।
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सपा सरकार के काम पर पर्दा डालने की साजिश
सपा अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा सरकार ने विकास का काम तमाम करने का ही काम किया है। राजधानी में जो विश्वस्तरीय निर्माण होने थे, उनमें भी बाधा डाली जा रही है। भाजपा सरकार राजनीतिक बदले की भावना के तहत समाजवादी सरकार के कामों पर पर्दा डालने की साजिश करती आई है। समाजवादी सरकार द्वारा निर्मित देश का अत्याधुनिक जेपी इंटरनेशनल सेंटर भाजपा की कुदृष्टि का शिकार है। 812 करोड़ की लागत से निर्माणाधीन बेजोड़ इंफ्रास्ट्रक्चर को मुख्यमंत्री ने 130 करोड़ रुपये न देकर खंडहर बना दिया है। 

महंगे डीजल से बढ़ी परेशानी
सपा अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा सरकार की किसान विरोधी नीतियां किसानों के लिए काल बन गई है। प्रदेश भर में गेहूं खरीद के लटके बकाये से किसान बेहाल हैं। अकेले झांसी मंडल में 89 करोड़ रुपये का बकाया है। महंगे डीजल से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। उनका किसानी का बजट बिगड़ गया है। घरेलू उपयोग की चीजों पर भी असर पड़ा है।

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