नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी
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नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने कहा, सदन की परंपरा रही है कि जो व्यक्ति सदन में नहीं है, उस पर आरोप न लगाए जाएं। मौर्य ने कहा कि दलबहादुर ने किसी नेता का नाम नहीं लिया, यदि किसी का नाम लिया है तो कार्यवाही से निकाल दिया जाए। लालजी वर्मा ने कहा कि मौर्य 25 साल बसपा में रहे हैं। वह भाजपा सरकार में मंत्री भले ही बन गए हैं लेकिन जो सम्मान उन्हें बसपा में मिला वह मंत्री बनने के बाद भी नहीं मिला।
इस दौरान मौर्य व लालजी वर्मा के बीच तीखी नोकझोंक और आरोप-प्रत्यारोप हुए। इस बीच संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना भी सदन में आ गए। लालजी वर्मा ने कहा कि किसी का अपमान करने के बाद टिप्पणी को कार्यवाही से निकालना पर्याप्त नहीं है। जिस सदस्य ने आपत्तिजनक शब्द कहे हैं, उसे अपने शब्द वापस लेने चाहिए।
आहत हुए हैं तो शब्द वापस लेता हूं: दल बहादुर
55 मिनट सदन स्थगित रहने के बाद बाद कार्यवाही शुरू होते ही अध्यक्ष ने दलबहादुर कोरी को बोलने का मौका दिया। कोरी ने कहा कि उन्होंने किसी नेता का नाम नहीं लिया है। एक नेता का नाम आया है तो मैं अपने शब्दों को वापस लेता हूं। उन्होंने कहा कि बहनजी (मायावती) ने लालजी टंडन को राखी बांधी थी। ब्रह्मदत्त और मैंने उनकी जान बचाई थी लेकिन उन्होंने हमेशा भाजपा को दगा दिया है। यदि मेरे शब्दों से कोई आहत हुआ है तो मैं शब्दों को वापस लेता हूं। इसी के बाद जाकर सदन सामान्य हुआ।
संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि विवाद ठीक नहीं था। उन्होंने अध्यक्ष से आग्रह किया कि जो शब्द गलत हैं, उन्हें कार्यवाही से निकाल दें। उन्होंने खुद भी घटनाक्रम पर दुख जताया। अध्यक्ष ने कहा कि वह तीनों नेताओं दलबहादुर कोरी, लालजी वर्मा और स्वामी प्रसाद मौर्य के वक्तव्य के जो भी अंश ठेस पहुंचाने वाले हैं, उन्हें कार्यवाही से निकलवा देंगे।